February 20, 2026
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माउंट और आदि कैलाश में क्या है अंतर? एक के लिए लेना पड़ता है इस देश का वीजा

  • May 16, 2025
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Last Updated:May 16, 2025, 16:49 IST आदि कैलाश और माउंट कैलाश हिंदू धर्म में पवित्र हैं. माउंट कैलाश तिब्बत में है और शिव का निवास है, जबकि आदि

माउंट और आदि कैलाश में क्या है अंतर? एक के लिए लेना पड़ता है इस देश का वीजा

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आदि कैलाश और माउंट कैलाश हिंदू धर्म में पवित्र हैं. माउंट कैलाश तिब्बत में है और शिव का निवास है, जबकि आदि कैलाश उत्तराखंड में है. माउंट कैलाश की यात्रा कठिन है और चीन का वीजा चाहिए, जबकि आदि कैलाश की यात्रा आस…और पढ़ें

माउंट और आदि कैलाश में क्या है अंतर? एक के लिए लेना पड़ता है इस देश का वीजा

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माउंट कैलाश Vs आदि कैलाश.

हाइलाइट्स

  • माउंट कैलाश तिब्बत में है, आदि कैलाश उत्तराखंड में.
  • माउंट कैलाश की यात्रा के लिए चीन का वीजा चाहिए.
  • आदि कैलाश की यात्रा भारत में आसान और सुलभ है.

आदि कैलाश और माउंट कैलाश दोनों ही हिंदू धर्म में बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं, लेकिन ये दो अलग-अलग पहाड़ हैं, जो अपनी धार्मिक मान्यताओं और यात्रा की विशेषताओं में एक-दूसरे से बहुत अलग हैं. बहुत से लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनके बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं. आइए, जानते हैं इन दोनों पवित्र स्थानों के बारे में…

माउंट कैलाश तिब्बत चीन में स्थित है और इसे भगवान शिव का मुख्य निवास स्थान माना जाता है. हिंदू धर्म के अलावा, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के लोग भी इसे पवित्र मानते हैं. यह 6,638 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसके पास मानसरोवर झील और राक्षसताल जैसे पवित्र जलाशय हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, माउंट कैलाश के दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है. इसकी परिक्रमा, जिसे ‘कोरा’ कहते हैं, 52 किलोमीटर लंबी है और इसे पूरा करने में तीन दिन लगते हैं. यह यात्रा बहुत कठिन है, क्योंकि ऊंचाई और कठोर मौसम की वजह से शारीरिक और मानसिक तैयारी जरूरी होती है.माउंट कैलाश की यात्रा के लिए भारतीयों को चीन का वीजा लेना पड़ता है, जो इस यात्रा को पूरा करने में किसी बड़े बाधा की तरह है. इस पहाड़ को कोई भी चढ़ नहीं सकता, क्योंकि इसे भगवान शिव का निवास मानकर पवित्र माना जाता है.

वहीं, आदि कैलाश को छोटा कैलाश भी कहते हैं. यह भारत के उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है. यह 6,310 मीटर की ऊंचाई पर है और इसे भी भगवान शिव और पार्वती का निवास माना जाता है. आदि कैलाश के पास पार्वती सरोवर और गौरी कुंड जैसे पवित्र स्थान हैं. इसकी यात्रा माउंट कैलाश की तुलना में आसान और अधिक सुलभ है, क्योंकि यह भारत में ही है और इसके लिए विदेशी वीजा की जरूरत नहीं पड़ती. आदि कैलाश की यात्रा धारचूला से शुरू होती है और इसमें ट्रैकिंग, सड़क यात्रा और कुछ स्थानों पर हेलीकॉप्टर की सुविधा भी उपलब्ध है. यह यात्रा खासकर मई से अक्टूबर के बीच की जाती है, जब मौसम अनुकूल होता है. आदि कैलाश को रंग समुदाय के लोग बहुत पवित्र मानते हैं और उनकी मान्यता है कि यह भगवान शिव का प्राचीन निवास था.

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दोनों स्थानों की धार्मिक मान्यताएं भी अलग-अलग हैं. माउंट कैलाश को विश्व का केंद्र माना जाता है, जबकि आदि कैलाश को पंच कैलाश में से एक माना जाता है. आदि कैलाश की यात्रा में ओम पर्वत का दर्शन भी होता है, जहां बर्फ से प्राकृतिक रूप से ओम का चिह्न बनता है. माउंट कैलाश की यात्रा अधिक जटिल और लंबी है, जबकि आदि कैलाश की यात्रा छोटी और शांत है. इस प्रकार, दोनों पर्वत अपनी अनूठी विशेषताओं और आध्यात्मिक महत्व के लिए फेमस हैं.

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Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 2 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 2 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18… और पढ़ें

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