February 21, 2026
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भारत में शामिल होने वाला था बलूच‍िस्‍तान, फ‍िर कैसे हो गया खेल?

  • May 2, 2025
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Last Updated:May 02, 2025, 04:16 IST India Pakistan tension: बलूचिस्तान की जनता वर्षों से विद्रोह कर रही है और भारत से आजादी की अपील करती है. बलूचिस्तान एक

भारत में शामिल होने वाला था बलूच‍िस्‍तान, फ‍िर कैसे हो गया खेल?

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India Pakistan tension: बलूचिस्तान की जनता वर्षों से विद्रोह कर रही है और भारत से आजादी की अपील करती है. बलूचिस्तान एक समय भारत में शामिल होना चाहता था, लेकिन जबरन पाकिस्तान का हिस्सा बना दिया गया.

भारत में शामिल होने वाला था बलूच‍िस्‍तान, फ‍िर कैसे हो गया खेल?

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नेहरू ज‍िन्‍ना के खेल में जब उलझा बलूच‍िस्‍तान. (Image: British Library)

हाइलाइट्स

  • बलूचिस्तान भारत में शामिल होना चाहता था, पर जबरन पाकिस्तान का हिस्सा बना.
  • मुहम्‍मद अली जिन्ना बलूचिस्तान को पाकिस्तान में शामिल नहीं करना चाहते थे.
  • तब का घाव आज तक भरा नहीं है. बलूच नेता भारत से आजादी की अपील करते हैं.

बलूच‍िस्‍तान की जनता वर्षों से विद्रोह कर रही है. वह पाक‍िस्‍तान के साथ रहना नहीं चाहती. बलूच नेता भारत से, पीएम मोदी से अपील करते हैं क‍ि हमें आजाद करवा दीजिए. वहां की मह‍िलाएं पीएम मोदी को अपना भाई बताती हैं. लेकिन आप जानकर हैरान होंगे क‍ि एक वक्‍त ऐसा भी था जब बलूच‍िस्‍तान भारत में शामिल होना चाहता था. मुहम्‍मद अली‍ जिन्‍ना भी नहीं चाहते थे क‍ि बलूच‍िस्‍तान पाक‍िस्‍तान का ह‍िस्‍सा बने, लेक‍िन ऐन मौके पर खेल हो गया.

दरअसल, जब भारत का बंटवारा हुआ तो स्टेट ऑफ कलात यानी बलूचिस्तान करीब 227 दिनों तक आजाद रहा. वह पाक‍िस्‍तान के साथ जाना नहीं चाहता था. ज‍िन्‍ना इसल‍िए बलूचिस्तान को पाक‍िस्‍तान में शामिल नहीं करना चाहते थे, क्‍योंक‍ि वहां का पूरा इलाका सर्द रेगिस्तान है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन्‍ना ने सलाह दी थी क‍ि 15 अगस्‍त 1947 के बाद बलूच‍िस्‍तान एक अलग देश के रूप में रह सकता है. जर्मनी के पोल‍िट‍िकल साइंट‍िस्‍ट मार्टिन एक्समैन ने बलूच‍िस्‍तान पर ‘बैक टू द फ्यूचर: द खानेट ऑफ कलात एंड द जेनेसिस ऑफ बलोच नेशनलिजम 1915-1955’ नाम से क‍िताब ल‍िखी है. इसमें उन्‍होंने पूरी कहानी बयां की है.

कहां से उठी ये बात
मार्टिन ने इस क‍ि‍ताब में लिखा है, बलूच‍िस्‍तान के लोग चाहते थे क‍ि आजाद रहने में भारत और पाक‍िस्‍तान उनकी मदद करे. कलात स्टेट नेशनल पार्टी ने 1945 में ऑल इंडिया स्टेट पीपल्स कॉन्‍फ्रेंस में भी हिस्सा लिया था. इस कार्यक्रम के चीफ गेस्‍ट जवाहर लाल नेहरू थे. कलात राष्‍ट्रवादी थे, इसल‍िए वे मुस्‍ल‍िम लीग के नेतृत्‍व वाले पाक‍िस्‍तान के साथ नहीं जाना चाहते थे. इसीलिए वे भारत के साथ रिश्ता मजबूत कर रहे थे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. जबरन बलूच‍िस्‍तान को पाक‍िस्‍तान का ह‍िस्‍सा बनाया गया. लेकिन बलूच‍िस्‍तान का पाक‍िस्‍तान में विलय ही इस शर्त पर हुआ क‍ि सरकार इनके आंतर‍िक मामलों में दखल नहीं देगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

क्‍या चाहते थे बलूच
हालांक‍ि, एक और तथ्‍य है. टीसीए राघवन का कहना है क‍ि खान ऑफ कलात सिर्फ अलग दर्जा चाहते थे. उनका मकसद था कि कलात के लिए अलग कैटिगरी बनाई जाए. वे कहते थे क‍ि सिर्फ मुसलमान होने की वजह से उन्‍हें पाक‍िस्‍तान में शामिल नहीं क‍िया जाना चाह‍िए. ईरान की तरह उनका कल्‍चर अलग है. इसल‍िए वे ईरान के साथ बात कर रहे थे तो भारत के साथ भी बातचीत कर रहे थे. वे जवाहर लाल नेहरू से मदद चाहते थे. वीके मेनन का कहना था क‍ि बलूच नेताओं ने नई दिल्ली से संपर्क कर बलूचिस्तान को भारत में मिलाने का आग्रह किया था लेकिन इस आग्रह को खारिज कर दिया गया था. हालांक‍ि, कुछ इत‍िहासकारों का दावा है क‍ि बलूच ने कभी भारत के साथ जाने की इच्‍छा नहीं जताई थी.

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