February 19, 2026
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बिना सेनेटरी पैड के भुगत रहीं दौसा की महिलाएं, भयंकर खतरा जान कर डर जाएंगे आप

  • April 17, 2025
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Last Updated:April 17, 2025, 18:24 IST राजस्थान के दौसा जिले में महिलाओं को 6 महीने से सेनेटरी पैड नहीं मिले हैं, जिससे वे पुराने कपड़े को इस्तेमाल करने

बिना सेनेटरी पैड के भुगत रहीं दौसा की महिलाएं, भयंकर खतरा जान कर डर जाएंगे आप

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राजस्थान के दौसा जिले में महिलाओं को 6 महीने से सेनेटरी पैड नहीं मिले हैं, जिससे वे पुराने कपड़े को इस्तेमाल करने के लिए मजबूर है. इससे संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ता है. आइए जानते हैं इससे होने वा…और पढ़ें

बिना सेनेटरी पैड के भुगत रहीं दौसा की महिलाएं, भयंकर खतरा जान कर डर जाएंगे आप

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राजस्थान के दौसा जिले की महिलाओं को 6 महीने से पैड नहीं मिले हैं.

हाइलाइट्स

  • दौसा में 6 महीने से महिलाओं को सेनेटरी पैड नहीं मिले.
  • महिलाएं पुराने कपड़े का उपयोग कर रही हैं.
  • संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा.

आज भी भारत के कई ग्रामीण इलाकों में महिलाएं मासिक धर्म (Periods) के दौरान सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल नहीं कर पातीं. राजस्थान के दौसा जिले की महिलाओं की स्थिति ही देख लीजिए, यहां कि महिलाओं को पिछले 6 महीने से सरकार की तरफ से सेनेटरी पैड नहीं मिले हैं. तभी कई बार मजबूरी और जागरूकता की कमी के चलते ये महिलाएं पुराने कपड़े का सहारा लेती हैं, जो किसी भी भयंकर नुकसान से कम नहीं है.

गायनेकॉलजिस्ट डॉ. मनु लक्ष्मी के मुताबिक, पीरियड्स के समय शरीर में किसी भी तरह के इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में साफ-सुथरे, हाइजीनिक सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. देशभर में इसको लेकर जागरूकता फैलाने के लिए मूवी जैसे पैडमैन और विज्ञापनों का सहारा लिया गया, लेकिन इसका क्या फायदा?  जब गांव तक महिलाओं के पास ये सेनेटरी पैड ही नहीं पहुंच पा रहे हैं. वैसे पीरियड्स की शुरूआत 11-12 साल की उम्र में ही हो जाती है जब इतने कम उम्र की लड़कियों के पास इसकी सुविधा नहीं होगी तो सोचिए उनकी ग्रोथ पर क्या असर पड़ेगा. गंदे कपड़े के बार-बार उपयोग से कई तरह के बैक्टीरिया पनपते हैं, जो इंफेक्शन के खतरे को बढ़ा देते हैं. इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), वेजाइनल इंफेक्शन, स्किन रैशेज, और यहां तक कि रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर भी भयंकर खतरा बढ़ता है.

पीरियड्स में गंदा कपड़ा यूज कर रहें तो जानें खतरा भी
कई ग्रामीण इलाकों में पीरियड्स के दौरान गंदा कपड़ा यूज करने से महिलाओं की मौत के मामले भी सामने आए हैं. दरअसल, इन गंदे कपड़ों को सुखाने और स्टोर करने में भी समस्याएं होती हैं. अधिकतर महिलाएं शर्म की वजह से कपड़ों को छुपाकर सुखाती हैं, जिससे वे ठीक से सूख नहीं पाते और उनमें नमी बनी रहती है. यह नमी बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन को बढ़ावा देती है. समय पर इलाज न होने पर ये समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं. इसके अलावा, खराब हाइजीन से सेहत पर मानसिक प्रभाव भी पड़ता है.

क्यों जरूरी है सेनेटरी पैड? 
सेनेटरी नैपकिन का  उपयोग महिलाओं को स्वस्थ रखने का एक आसान उपाय है. सबसे पहली चीज तो वैजाइनल से जुड़ी बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन से आप बचे रहते हैं. गंदगी और संक्रमण से होने वाली बीमारियां, जैसे पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) या बांझपन जैसी समस्याएं सेनेटरी पैड के प्रयोग से काफी हद तक रोकी जा सकती हैं. इसीलिए, सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म से जुड़ी गलत धारणाओं को तोड़ने के लिए जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है.

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