बांध लो बोरिया बिस्तर…SDM ने जारी किया अल्टीमेटम, अब नहीं मिलेगा और मौका

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Balaghat News: बालाघाट में कई सेवानिवृत्त कर्मचारी अब भी सरकारी क्वार्टर खाली नहीं कर रहे हैं, जिससे नए कर्मचारियों को मुश्किल हो रही है. वैनगंगा संभाग के कार्यपालन यंत्री की शिकायत पर एसडीएम गोपाल सोनी ने 12 र…और पढ़ें

बालाघाट में शासकीय कॉलोनियों में रह रहे सेवानिवृत्त कर्मचारी
हाइलाइट्स
- बालाघाट में 12 रिटायर्ड कर्मचारियों को क्वार्टर खाली करने का नोटिस.
- 23 मार्च के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी.
- बकाया किराया भी वसूला जाएगा.
सरकारी सेवा पूरी करने के बाद ज़िम्मेदारी से विदा लेना जितना गरिमामय होता है, उतनी ही ज़रूरी होती है सरकारी संसाधनों को समय पर लौटाना. लेकिन मध्य प्रदेश के बालाघाट में कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी इस सिद्धांत को शायद भूल चुके हैं. वर्षों की सेवा के बाद भी ये कर्मचारी अभी तक अपने सरकारी आवास खाली करने को तैयार नहीं हैं, जिससे नए अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.
नोटिस जारी, कार्रवाई की उलटी गिनती शुरू
बालाघाट में निरीक्षण गृह खलासी क्वार्टर से लेकर संजय सरोवर कॉलोनी और बाघ कॉलोनी तक ऐसे कई सरकारी क्वार्टर हैं जिन पर अब भी सेवानिवृत्त कर्मचारी जमे हुए हैं. हनीफ खान, पूनालाल भंडारी, सूरजलाल बिसेन, नारायण बनवाले, संजय श्रीवास्तव, गिरीश व्यास, प्रमिला नागेश्वर, कुंदनराव और अन्य को एसडीएम गोपाल सोनी ने नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया है—23 मार्च के बाद अनधिकृत कब्जे पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
सुनवाई का मिला मौका, अब नहीं चलेगा बहाना
यह कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है. इन कर्मचारियों को कानूनी रूप से सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया. शिकायत वर्ष 2023 में ही की गई थी लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव, फिर वर्षा ऋतु के चलते कार्रवाई टलती रही. अब एसडीएम की विशेष टीम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी और यदि ज़रूरत पड़ी तो बकाया किराया भी वसूला जाएगा.
सरकारी घरों पर गैरकानूनी कब्जा बना रहा बाधा
वैनगंगा संभाग के कार्यपालन यंत्री की शिकायत पर यह संपूर्ण प्रक्रिया शुरू हुई. सरकारी आवासों की सीमित संख्या के कारण जब सेवानिवृत्त कर्मी घर खाली नहीं करते, तो नए कर्मचारियों को अस्थायी और असुविधाजनक व्यवस्था में रहना पड़ता है. यह न सिर्फ व्यवस्था पर दबाव डालता है, बल्कि अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
अब इंतज़ार 23 मार्च का
सरकार का मकसद किसी को बेदखल करना नहीं, बल्कि अनुशासन और निष्पक्षता को बनाए रखना है. यदि इस बार भी सहयोग नहीं किया गया, तो प्रशासन के पास कोई और रास्ता नहीं बचेगा.
