बच्चे के जन्म के बाद घर में क्यों गाड़ते हैं नार, ये है मान्यता
- April 14, 2025
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Last Updated:April 14, 2025, 20:49 IST umbilical cord related beliefs: बच्चों के जन्म के बाद उनके नार या अम्बिलिकल कॉर्ड को काटने और रखने के नियम और परंपराएं
Last Updated:April 14, 2025, 20:49 IST umbilical cord related beliefs: बच्चों के जन्म के बाद उनके नार या अम्बिलिकल कॉर्ड को काटने और रखने के नियम और परंपराएं
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मथुरा: बच्चों के जन्म के बाद एक तरफ जहां महिलाओं को कई नियमों और मान्यताओं का पालन करना पड़ता है वहीं प्रसव के दौरान उन्हें काफी पीड़ा भी झेलनी पड़ती है. प्रसव के बाद बच्चे की नार (Deep) या अम्बिलिकल कॉर्ड काटने की भी एक प्रक्रिया है. गांवों में तो आमतौर पर नाउन (एक जाति विशेष) की महिला ही नार काटती हैं और इसके लिए उन्हें नेग भी दिया जाता है. नार काटना प्राचीन पद्धति और प्राचीन संस्कृति है. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि प्राचीन परंपराओं में नार (Deep) काटने की परंपरा क्यों निभाई जाती है.
प्रसव के बाद जब अम्बिलिकल कॉर्ड को काटा जाता है तो इसका बहुत थोड़ा सा हिस्सा शिशु की तरफ होता है. मुख्य भाग माता की तरफ रहता है. बच्चों की नार प्लेसेन्टा से जुड़ी रहती है. प्लेसेन्टा माता के गर्भाशय की भीतरी सतह से चिपका रहता है. प्रसव के बाद यह गर्भाशय से छूटने लगता है और अगर नही छूटा तो छुटाना पड़ता है. कई बार इसके लिए ऑपरेशन की जरूरत भी पड़ जाती है.
इसके बाद माता की तरफ वाला नार का हिस्सा पारंपरिक तरीके से जमीन मे गाड़ दिया जाता है. हास्पिटल वाले बायोलॉजी वेस्ट प्रोडक्ट के रूप मे डिस्पोजल के लिए भिजवा देते है. कभी-कभी इसे परिरक्षित करके चिकित्सा महाविद्यालय की प्रयोगशालाओं या म्यूजियम में चिकित्सा छात्रों के अध्यापन के लिए भी रखा जाता है.
बात की जाए प्राचीन परंपराओं की तो यह परंपराएं विज्ञान से बिल्कुल हटकर हैं. यहां प्रसव के बाद बच्चे की नार (Deep) क्यों काटी जाती है यह अपने आप में एक प्राचीन परंपरा है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान स्थानीय बुजुर्ग महिला मीना देवी ने इस परंपरा को निभाने की बात कही है. यह सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी परंपरा निभाती चली आ रही हैं.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि महिला का प्रसव जब होता है तब बच्चे के साथ एक नाल नाभि से जुड़ी हुई आती है. इसे काटना बेहद ही शुभ माना गया है. कहा जाता है कि घर में भी इसे गड़ना शुभ संकेत माना जाता है.
नार के ऊपर इसलिए जलाई जाती है आग
लोकल 18 से बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि लड़का और लड़की के नार में फर्क होता है. लड़का जो है उसे घर का वंश चलाने वाला माना जाता है. इसलिए लड़के के नार को घर में ही गाड़ते हैं. लड़की के नार को नहीं गाड़ा जाता. बुजुर्ग महिला मीना देवी ने यह भी बताया कि नार के ऊपर आग जलाकर रखी जाती है जिससे कोई भी भूत प्रेत या निगेटिव एनर्जी उस पर असर न करें. ये प्रक्रियाएं परंपरा के अनुसार की जाती हैं.
