फिसलती हुई अलीनगर सीट पर मैथिली हो सकती है BJP की गारंटी
- October 7, 2025
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Last Updated:October 07, 2025, 13:47 IST Maithili Thakur Entry in Bihar Election: मिथिला की बेटी और देश-विदेश में अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरने वाली मैथिली ठाकुर बीजेपे
Last Updated:October 07, 2025, 13:47 IST Maithili Thakur Entry in Bihar Election: मिथिला की बेटी और देश-विदेश में अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरने वाली मैथिली ठाकुर बीजेपे
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मैथिली ठाकुर का बिहार चुनाव में धमाकेदार एंट्री. Maithili Thakur Entry in Bihar Chunav: मैथिली ठाकुर किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. अपनी शास्त्रीय आवाज की जादू से वे देश-विदेश में मशहूर हो चुकी है. अब मैथिली ठाकुर उम्र के शुरुआती पड़ाव में ही राजनीति के गलियारों में कूद पड़ी है. बीजेपी नेता विनोद तावड़े से मुलाकात के बाद उन्होंने अलीनगर या बेनीपट्टी में किसी एक सीट पर चुनाव लड़ने की इच्छा प्रकट की है. संभव है उन्हें इन दोनों में से ही किसी एक सीट से लड़ाया जाय. चूंकि मैथिली मिथिला की बेटी मानी जाती है और इसपर वे गर्व भी करती हैं. चूंकि मैथिली ठाकुर बेनीपट्टी की रहने वाली हैं इसलिए उनकी पूरी कोशिश होगी कि वे इसी सीट से चुनाव लड़े लेकिन पार्टी की मंशा अलीनगर से लड़ाने की कहीं अधिक होगी. इसके कई कारण है. यहां हम आपको अलीनगर विधानसभा सीट का पूरा लेखा-जोखा और जातीय समीकरण के बारे में बताएंगे जिनसे आपको सहज ही अंदाजा लग जाएगा कि मैथिली ठाकुर अलीनगर सीट से बीजेपी की किस तरह गारंटी साबित हो सकती हैं.
2005 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति में मनीगाछी सीट जनता दल यू और उससे पहले समता पार्टी को मिला करती थी. लेकिन बार-बार हारने के कारण 2005 में यह सीट तब गठबंधन में शामिल मुकेश सहनी की पार्टी को मिल गई लेकिन बीजेपी ने इसमें पेंच फंसा दिया. कहा गया कि चूंकि वीआईपी के पास जीतने वाले उम्मीदवार नहीं है, इसलिए इस सीट पर बीजपे का आदमी ही वीआईपी के चुनाव निशान पर चुनाव लड़ेगा. इसके तहत मिश्री लाल यादव को यहां से टिकट दे दिया गया. जीतने के बाद कायदे से वे मुकेश सहनी के आदमी हो गए लेकिन जब मुकेश सहनी को मंत्री पद से हटा दिया गया तो कुछ ही दिनों बाद मिश्री लाल यादव बीजेपी में शामिल हो गए. यहां से यादव को इसलिए उतारा गया क्योंकि यादवों की अच्छी खासी संख्या यहां है. बीजेपी की सोच थी कि राजद के ब्राह्मण उम्मीदवार होने के बावजूद ब्राह्मणों का एकमुश्त मत उसे ही मिलेगा क्योंकि ब्राह्मण समाज लालटेन छाप पर वोट नहीं देगा. दूसरी ओर यादव उम्मीदवार होने के कारण यादवों को वोट भी मिलेगा और हमारा कैंडिडेट जीत जाएगा. यह समीकरण थोड़ा-बहुत काम तो किया और इस दम पर मिश्री लाल यादव मामूली मत से जीत भी गए लेकिन जातीय समीकरण में बीजेपी पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई. अलीनगर सीट पर ब्राह्मणों की आबादी बहुत अधिक है, इसके बावजूद ब्राह्मणों का अधिकांश मत राजद के विनोद मिश्र के खाते में गया.क्योंकि ये यादव उम्मीदवार को वोट करने के पक्ष में नहीं थे. दूसरी ओर यादवों का भी अधिकांश मत विनोद मिश्र के ही खाते में गया. इस तरह 100 फीसदी मुसलमान, आधे ब्राह्मण और आधे यादवों का वोट राजद खाते में चला गया जिसकी कल्पना बीजेपी ने नहीं की होगी. बीजेपी को यही डर सता रहा है कि अगर इस बार मजबूत ब्राह्मण उम्मीदवार को खड़ा नहीं किया तो यह सीट हाथ से निकल जाएगी. चूंकि मैथिली ठाकुर बेहद चर्चित हैं और ब्राह्मण भी हैं और स्थानीय हैं, इसलिए उन्हें लगभग 80 से 90 फीसदी ब्राह्मणों का मत मिलना तय है, दूसरी तरफ ओबीसी और दलित वोटों की अच्छी खासी संख्या उनके खाते में आ सकती है. चूंकि मैथिली बेहद चर्चित हैं, इसलिए वे आस-पड़ोस की सीट पर भी असर डाल सकती है और अन्य जातियों का वोट भी खींच सकती है. इसलिए अलीनगर की फिसलती हुई सीट पर मैथिली ठाकुर बीजेपी की गारंटी साबित हो सकती है.
जो लोग बिहार के लिए बड़े सपने देखते हैं, उनके साथ हर बातचीत मुझे दूरदृष्टि और सेवा की शक्ति की याद दिलाती है। हृदय से सम्मानित और आभारी हूँ। 🙏✨
श्री नित्यानंद राय जी एवं श्री विनोद श्रीधर तावड़े जी 🙏 https://t.co/o6PBAVJaEJ
