फरीदाबाद में कूड़े का किला! सड़क पर उतरे लोग बोले-यहां जीना सजा है

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Faridabad Dumping Yard: फरीदाबाद के सेक्टर 56 और 56A में स्थित डंपिंग यार्ड स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन गया है. राजीव कॉलोनी, दिलीप कॉलोनी, प्रतापगढ़ और समयपुर के लोग गंदगी और बदबू से परेशा…और पढ़ें

फरीदाबाद डंपिंग यार्ड प्रदूषण से लोग परेशान.
हाइलाइट्स
- फरीदाबाद के डंपिंग यार्ड से लोग परेशान हैं.
- बच्चों को त्वचा रोग और बुजुर्गों को सांस की समस्याएं हो रही हैं.
- प्रदर्शनकारियों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.
विकास झा/फरीदाबाद: हर सुबह जब राजीव कॉलोनी, प्रतापगढ़, दिलीप कॉलोनी और समयपुर के लोग आंखें खोलते हैं, तो उनके सामने एक नहीं, सैकड़ों समस्याएं होती हैं. वजह सेक्टर 56 और 56A में मौजूद वह डंपिंग यार्ड, जिसने इलाके को धीरे-धीरे बीमारियों और बदहाली के गर्त में धकेल दिया है. यहां अब कूड़ा सिर्फ जमीन पर नहीं, लोगों की सांसों में, बच्चों के शरीर पर और बुजुर्गों की तकलीफों में बसा हुआ है.
गंध से गूंजते मोहल्ले, उम्मीदों में बुझते चेहरे
स्थानीय निवासी विजय सिंह की आंखों में नाराज़गी है, लेकिन शब्दों में लाचारी भी. “चुनाव के समय डंपिंग हटाने का वादा था, आज वही नेता नज़र नहीं आते,” वे कहते हैं. वहीं, सतीश प्रसाद बताते हैं कि हवा इतनी ज़हरीली हो गई है कि उनके पोते को हर रात सांस लेने में तकलीफ होती है. दवाओं से ज्यादा अब उन्हें साफ हवा की ज़रूरत है.
न्याय की जगह धमकियों का सामना
सबसे दुखद पहलू तब सामने आया जब प्रदर्शन करने उतरे लोगों के साथ पुलिस ने सख्ती दिखाई. मिथिलेश कुमार सिंह ने बताया कि एक युवक सिर्फ वीडियो बना रहा था, उसका मोबाइल छीन लिया गया और कुछ लोगों को हिरासत में भी ले लिया गया. सवाल यह है कि क्या अब अपने हक़ के लिए आवाज उठाना भी गुनाह हो गया है?
सालों से जारी अनदेखी
यह डंपिंग यार्ड कोई नया नहीं है, सालों से यहां रह रहे लोग इसकी वजह से तमाम तरह की बीमारियों का शिकार हो चुके हैं. बच्चों की त्वचा पर लाल धब्बे, बुजुर्गों की साँसें उखड़ती हुई, और घरों में बंद खिड़कियाँसबकुछ इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह केवल एक सफाई का मुद्दा नहीं, बल्कि इंसानी गरिमा और स्वास्थ्य का संकट बन चुका है.
प्रदर्शनकारियों की चेतावनी
लोगों ने चेताया है कि अगर प्रशासन जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो अगला आंदोलन और बड़ा होगा. वे थक चुके हैं बदबू से, बीमारियों से और सबसे ज़्यादा, झूठे वादों से. अब सवाल यही है क्या प्रशासन इस आवाज को सुनेगा या फिर यह इलाका सिर्फ कूड़े का हिस्सा बनकर रह जाएगा?
