जम्मू. जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास अग्रिम गांवों में 60 से अधिक गोलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया. रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी. प्रवक्ता ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जान-माल की सुरक्षा के लिए जारी प्रयासों के तहत चजला, झूलास, मेंढर, मनकोट और लोअर कृष्णा घाटी गांवों में गोले निष्क्रिय किए गए.
उन्होंने बताया कि सेना सात से 10 मई के बीच पाकिस्तान द्वारा की गई गोलाबारी के बाद बिना फटे गोलों को व्यवस्थित तरीके से निष्क्रिय कर रही है. प्रवक्ता ने कहा, “अक्सर नागरिक बस्तियों को निशाना बनाकर की जाने वाली गोलाबारी से प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों और पशुओं के लिए लगातार खतरा पैदा होता है. अब तक कुल 67 गोले सफलतापूर्वक निष्क्रिय किए जा चुके हैं.”
उन्होंने बताया कि ये अभियान सेना द्वारा आबादी वाले और कृषि क्षेत्रों से खतरनाक विस्फोटकों को हटाने की व्यापक पहल का हिस्सा हैं. उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही सेना ने अत्यंत सावधानी के साथ इन गोलों को नष्ट किया है. प्रवक्ता ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षा घेरे में ले लिया जाता है और नियंत्रित विस्फोटों के दौरान कोई नुकसान न हो, इसके लिए नागरिकों को अस्थायी रूप से वहां से दूसरी जगह पर हटा दिया जाता है.
बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष लोगों पर घातक हमला किया था, जिसमें 26 नागरिकों की निर्मम हत्या कर दी गई थी. हमले के पहले आतंकियों ने धर्म पूछा फिर लोगों को मौत के घाट उतारा. मृतकों में बड़ी संख्या में पर्यटक शामिल थे. इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद भारतीय सेना ने 7 मई को आतंकियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत की. सेना की इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसमें मसूद अजहर के लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हाफिज सईद के जमात-उद-दावा के आतंकी शिविर भी शामिल थे.
वहीं, पाकिस्तानी सेना ने जवाबी हमले के प्रयास में भारत पर ड्रोन और मिसाइलें दागीं, लेकिन भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम्स जैसे आकाशतीर और एस-400 ने उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया. इसके बाद भारत ने कड़ा पलटवार करते हुए पाकिस्तान के 9 से 11 वायुसेना ठिकानों को तबाह कर दिया. इस सख्त सैन्य कार्रवाई से घबराई पाकिस्तानी सेना ने संघर्षविराम की अपील की. पाकिस्तानी डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से संपर्क कर तनाव समाप्त करने का प्रस्ताव रखा, जिस पर दोनों देशों ने अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई. भारत ने अपनी सैन्य कार्रवाई के प्रमाण भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रस्तुत किए, जिससे यह साफ हो गया कि भारत की जवाबी कार्रवाई सिर्फ आत्मरक्षा नहीं, बल्कि आतंक के ठिकानों को जड़ से खत्म करने की निर्णायक नीति का हिस्सा थी.