पशुओं के चारे के लिए नहीं होगी परेशानी, इस योजना से मुफ़्त ट्रेनिंग की सुविधा
- June 8, 2025
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Last Updated:June 08, 2025, 05:27 IST चारा की समस्या से निपटने के लिए पशुपालकों को घास और चारे के बीज, साइलो पिट निर्माण की जानकारी तथा चारा संरक्षण
Last Updated:June 08, 2025, 05:27 IST चारा की समस्या से निपटने के लिए पशुपालकों को घास और चारे के बीज, साइलो पिट निर्माण की जानकारी तथा चारा संरक्षण
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हाइलाइट्स
गोड्डा: जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का मुख्य आधार है, लेकिन गर्मी के मौसम में चारे की किल्लत किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है. पहले पशुपालक अपने पशुओं को गोचर या फिर कई किलोमीटर दूर तक चारा की खोज में ले जाते थे, यहां तक कि कुछ किसान गोड्डा से बिहार के गंगा किनारे तक पहुंच जाते थे ताकि पशुओं को हरा चारा मिल सके. लंबे सफर की वजह से न सिर्फ पशुओं की ताकत पर असर पड़ता था, बल्कि दूध उत्पादन में भी भारी गिरावट देखने को मिलती थी.
खेतों में खुद करें चारे का उत्पादन
इसके अलावा पशुपालकों को घास और चारे के बीज, साइलो पिट निर्माण की जानकारी तथा चारा संरक्षण तकनीक भी दी जाती है, जिससे वे खुद अपने खेतों में चारे का उत्पादन कर सकें और साल भर पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में पोषण उपलब्ध हो सके.
दुग्ध उत्पादन में होगी भारी बढ़ोतरी
गोड्डा के कृषि विज्ञान केंद्र के पशुपालन वैज्ञानिक के अनुसार किसान केवीके गोड्डा से प्रशिक्षण लेकर अपने कम से कम जमीन पर हाथी घास का उत्पादन कर सकते हैं. जो कि पशुओं के लिए एक बेहतरीन चारा का विकल्प है. इस घास से पशुओं का दूध, अंडा और मांस हर चीज बढ़ेगा और पशु मजबूत भी होंगे. अगर सभी पशुपालक वैज्ञानिक तरीके से चारा प्रबंधन करें, तो जिले में दुग्ध उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हो सकती है और पशुपालन और भी अधिक लाभकारी व्यवसाय बन सकता है.
