न पहाड़ टूटे, न आसमान फटा, पर बालाघाट में जो हुआ, वो किसी आपदा से कम नहीं!
- May 9, 2025
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Last Updated:May 09, 2025, 20:32 IST Water Crisis In Balaghat: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में जल संकट गहराता जा रहा है. लामता तहसील के गांवों में लोग
Last Updated:May 09, 2025, 20:32 IST Water Crisis In Balaghat: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में जल संकट गहराता जा रहा है. लामता तहसील के गांवों में लोग
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हाइलाइट्स
बालाघाट. मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले को जल अभावग्रस्त घोषित किया गया है. जिले में भीषण जल संकट देखा जा रहा है. स्थिति इतनी गंभीर है कि लोगों को दैनिक जरूरतों के साथ-साथ पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. यह संकट विशेष रूप से लामता तहसील के अंतर्गत आने वाले गांवों में देखने को मिल रहा है. लोकल 18 की टीम ने इन गांवों का दौरा कर जल संकट की स्थिति का जायजा लिया.
टीम की सबसे पहली मुलाकात बुजुर्ग मेहतरलाल उईके से हुई. वे चिलचिलाती धूप में हैंडपंप से पानी भर रहे थे. जब उनसे पूछा गया कि इतनी धूप में पानी क्यों भर रहे हैं, तो उन्होंने बताया कि सुबह और शाम के समय हैंडपंप पर भारी भीड़ लगती है. इसलिए वे दोपहर के समय ही पानी भरना उचित समझते हैं.
लामता से 10 किलोमीटर दूर गांवों में संकट
लामता से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित आधा दर्जन गांवों में भीषण जल संकट है. महकापाटा गांव इन गांवों में प्रमुख है. यहां करीब 350 से ज्यादा लोग रहते हैं. लेकिन गांव के लोग सिर्फ एक हैंडपंप पर निर्भर हैं. गांव के बाकी कुएं पूरी तरह से सूख चुके हैं और तीन में से केवल एक हैंडपंप काम कर रहा है. यह भी केवल पीने के पानी के लिए उपयोग किया जा रहा है. नहाने और अन्य कामों के लिए लोगों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है.
अन्य जरूरतों के लिए पानी नहीं
टीम जब एक घर में पहुंची तो वहां बर्तन और कपड़ों का ढेर लगा था. घरवालों ने बताया कि पानी की कमी की वजह से बर्तन और कपड़े नहीं धुल पा रहे हैं. बर्तन धोने तक के लिए पानी बड़ी मुश्किल से जुटाना पड़ता है.
झरनों की तलाश में जाते लोग
महकापाटा के लोग पीने का पानी किसी तरह गांव के हैंडपंप से भर लेते हैं. लेकिन नहाने और कपड़े धोने के लिए उन्हें गांव से दूर किसी झरने की तलाश करनी पड़ती है. वहां जाकर ही वे अपनी अन्य जरूरतें पूरी कर पाते हैं.
आवास योजना का काम भी ठप
गांव में पानी की भारी किल्लत के चलते प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाले मकानों का निर्माण भी रुक गया है. मकान बनाने के लिए पानी की आवश्यकता होती है. इसके लिए लोगों को टैंकर से पानी मंगवाना पड़ता है. जिससे मकान की लागत काफी बढ़ जाती है और निर्माण कार्य ठप पड़ा है.
सिर्फ एक गांव नहीं, कई गांवों की यही हालत
महकापाटा गांव की तरह पुजारीटोला, अर्नामेटा, हिरवाटोला और तिखाखारी जैसे गांवों की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है. इन गांवों में भी जल संकट गहराता जा रहा है. पानी की इस कमी ने लोगों के दैनिक जीवन को कठिन बना दिया है. स्थिति इतनी गंभीर है कि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकाला गया तो समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है.
