बाराबंकी. उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में 400 से ज्यादा वेटलैंड्स हैं. यहां की जियो टैगिंग की शुरुआत हो चुकी है. यह जगह प्रवासी पक्षियों की पसंदीदा बनती जा रही है और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है. वेटलैंड्स, यानी आर्द्रभूमि, जैसे दलदल, पोखर, झील आदि, वो भूभाग हैं जहां पानी स्थायी या मौसमी रूप से मिट्टी को संतृप्त करता है. इन क्षेत्रों में जल स्तर सतह के पास या उसके ऊपर होता है. ये क्षेत्र स्थलीय और जलीय पारिस्थितिक प्रणालियों के बीच एक संक्रमणकालीन क्षेत्र होते हैं, जो कई जीवों को आवास प्रदान करते हैं और जैव विविधता को संरक्षण भी देते हैं.
डीएम शशांक त्रिपाठी ने बताया कि जनपद में 400 चिह्नित वेटलैंड्स का सीमांकन और जियो टैगिंग शुरू हो चुकी है. राजस्व टीमों द्वारा इन वेटलैंड्स की सीमाओं को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है. ‘सेव वेटलैंड्स कैंपेन’ पोर्टल पर हर मंगलवार इनका अपडेट देना अनिवार्य किया गया है. इस अभियान को तीन माह में पूरा करना है.
डीएफओ आकाशदीप वधावन ने बताया कि 2018 में केंद्र सरकार ने बाराबंकी में 2.25 हेक्टेयर या इससे अधिक क्षेत्रफल वाले 400 वेटलैंड्स की पहचान की थी. अब इन सभी का सीमांकन तेजी से किया जा रहा है. रेंज अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तहसीलों में एसडीएम से समन्वय बनाकर सीमांकन कार्य में तेजी लाएं और जो लोग वेटलैंड्स के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ कर रहे हैं, उनकी पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित करें.
केंद्र सरकार ने सैटलाइट सर्वे के जरिए बाराबंकी में 400 वेटलैंड्स चिह्नित किए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से भगहर झील, बनगांवा, चकौरा, भितरी, बैनाटीकाहार, कमरावां, सराई बराई, नटकौली, खुर्दमऊ आदि शामिल हैं. जनपद के इन 12 वेटलैंड्स को राज्य आर्द्रभूमि समिति से अधिसूचित कराने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है. अधिसूचना का ड्राफ्ट प्रमुख सचिव (पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन) को भेजा जा चुका है. अधिसूचना जारी होते ही वन विभाग को कानूनी अधिकार मिल जाएंगे जिससे इन वेटलैंड्स की सुरक्षा और बेहतर तरीके से हो सकेगी.