हैदराबाद. ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम, जीएचएमसी ने मानसून के मौसम में शहर में होने वाली जलभराव की समस्या से निपटने और नागरिकों को परेशानी से बचाने के लिए एक अभिनव और उन्नत तकनीक की शुरुआत की है. जीएचएमसी ने तूफानी जल निकासी नालियों की सफाई और रखरखाव के लिए रोबोटिक मशीनों का उपयोग शुरू किया है.
फिलहाल जीएचएमसी इस तकनीक का पायलट परीक्षण सर्कल 12 खैरताबाद और आसपास के इलाकों में कर रहा है. इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य नालियों में रुकावटों का पता लगाना और उनकी सटीक सफाई करना है, ताकि बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा न हो.
कैसे काम करती है यह रोबोटिक तकनीक?
ये उन्नत रोबोटिक मशीनें विशेष वाहनों पर लगाई जाती हैं और इन्हें प्रमुख सड़क चौराहों पर तैनात किया है. इन मशीनों की खासियत यह है कि इनमें हाई-रिज़ॉल्यूशन वाले सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं. ये कैमरे नालियों के अंदर की लाइव वीडियो फुटेज कंट्रोल रूम तक पहुँचाते हैं. इससे ऑपरेटरों को नालियों के अंदर की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट पता चलता है.
कैमरों की मदद से मलबा, कचरा, प्लास्टिक की थैलियाँ, मिट्टी का जमाव या किसी भी तरह की रुकावट का सटीक स्थान आसानी से पता चल जाता है. पहले पूरी नाली की सफाई की जाती थी, लेकिन अब केवल उसी स्थान पर सफाई पर ध्यान दिया जा सकता है जहाँ रुकावट हो. रुकावट का पता चलने के बाद रोबोट अपने मैकेनिकल आर्म्स या हाई-प्रेशर वॉटर जेट्स की मदद से उस स्थान की सफाई कर देता है. इससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होती है.
इस तकनीक के फायदे
रोबोटिक सफाई, मैनुअल सफाई की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और कारगर है. एक रोबोट कई मजदूरों के बराबर काम कम समय में कर सकता है. इससे सीवर और नालियों में उतरने वाले सफाई कर्मचारियों को जहरीली गैसों, संक्रमण आदि जैसे स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाया जा सकता है. चूँकि सफाई बहुत ही फोकस्ड तरीके से होती है, इसलिए आसपास के यातायात और दैनिक जीवन में कम रुकावट आती है.
ये रोबोट नालियों की स्थिति का डेटा और वीडियो एकत्र करते हैं, जिससे भविष्य में रखरखाव की योजना बनाने में मदद मिलती है. जीएचएमसी का यह कदम ‘स्मार्ट सिटी’ पहल का एक हिस्सा है. अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो निगम इसी तरह की उन्नत तकनीक को पूरे हैदराबाद शहर में लागू करने की योजना बना रहा है. इससे आने वाले मानसून सीजन में शहर में जलभराव की समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा.