धान की बुवाई करने से पहले मिट्टी में कर लें यह काम, पैदावार होगी दुगुनी
- April 17, 2025
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Last Updated:April 17, 2025, 13:18 IST मृदा परीक्षण प्रयोगशाला सुल्तानपुर में कार्यरत विशेषज्ञ सौरभ तिवारी ने बताया कि इस समय गेहूं की कटाई चल रही है. ऐसे में
Last Updated:April 17, 2025, 13:18 IST मृदा परीक्षण प्रयोगशाला सुल्तानपुर में कार्यरत विशेषज्ञ सौरभ तिवारी ने बताया कि इस समय गेहूं की कटाई चल रही है. ऐसे में
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सुल्तानपुर: गेहूं की कटाई लगभग-लगभग समाप्त हो चुकी है. ऐसे में गेहूं की कटाई के बाद खेत भी खाली हो रहे हैं और यह अगले एक महीने तक खेत खाली रहेंगे. उसके बाद मई के अंत में खेतों में धान की बुवाई चालू हो जाएगी. ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि इन एक महीने में अपने खेतों की मिट्टी में ऐसे कौन-कौन से उपाय करें जिससे धान की पैदावार दोगुनी हो जाए. आइए जानते हैं इस पर हम मृदा संस्थान के विशेषज्ञ से उनकी राय कि आखिर धान के खेत को तैयार करने के लिए मिट्टी सुदृढ़ हो इसके लिए क्या उपाय किया जाए…
करा दें जुताई
मृदा परीक्षण प्रयोगशाला सुल्तानपुर में कार्यरत विशेषज्ञ सौरभ तिवारी ने बताया कि इस समय गेहूं की कटाई चल रही है. ऐसे में गेहूं की कटाई होने के बाद जिस खेत में धान लगाना हो उसे खेत को कल्टीवेटर से कम से कम दो चक्कर जुतवा देना चाहिए. इसके साथ ही हो सके तो अप्रैल के अंत में या मई के शुरुआती सप्ताह में एक बार उसको पानी से भर दें, ताकि धान के समय खेतों में उगने वाले खरपतवार पहले ही उग आएं, क्योंकि मई में तापमान अधिक होता है. ऐसे में वह खरपतवार अधिक तापमान से नष्ट हो जाएंगे.
इस चीज का करें इस्तेमाल
एक्सपर्ट सौरभ तिवारी ने बताया कि गेहूं की कटाई के बाद धान के लिए खाली पड़े खेतों में अच्छी तरह से वर्मी कंपोस्ट या फिर जैविक खाद का छिड़काव कर देना चाहिए, ताकि पहली बारिश में वर्मी कंपोस्ट धान के पौधों के लिए काम करना शुरू कर दें.
मिट्टी की कराएं जांच
प्रत्येक क्षेत्र की मिट्टी की अपनी अलग-अलग विशेषताएं होती है. ऐसे में हमें मृदा अनुसंधान संस्थान में अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण अवश्य करना चाहिए. यदि वह धान की खेती के अनुकूल ना हो तो इसमें विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.
तापमान मिट्टी के लिए है उपयुक्त
चूंकि भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है और यहां की 55% आबादी आज भी कृषि कार्यों में संलग्न है, लेकिन संसाधनों के अभाव और नई टेक्नोलॉजी के प्रयोग के कम होने के कारण कृषि में गुणोत्तर वृद्धि नहीं हो पा रही. ऐसे में यदि इस गर्मी के मौसम की बात की जाए तो भारत में धान की खेती के लिए तापमान पर्याप्त रूप से अनुकूल रहता है. इसलिए, इन दो महीनों में खेतों को व्यवस्थित कर लेना चाहिए.
