देहरादून: उत्तराखंड में बरसात का मौसम आते ही सड़कों की हालत बुरी तरह बिगड़ जाती है. राजधानी देहरादून भी इससे अछूती नहीं है. जैसे ही बारिश होती है, शहर की कई मुख्य सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्योता देने लगते हैं. शिमला बायपास रोड, लांघा रोड, दुधली, तुनवाला, रिंग रोड, बालावाला, मियांवाला, नेहरूग्राम, बंजारावाला और मोथरोवाला जैसी जगहों पर सड़कें गड्ढों से पट चुकी हैं. थोड़ी ही बारिश में ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं और दोपहिया वाहन चालकों के गिरने की घटनाएं सामने आती हैं.
स्थानीय निवासी ईश कुमार ने बताया कि बारिश का मौसम तो परेशानी लेकर ही आता है, लेकिन पानी की निकासी नहीं होने से हालात और भी खराब हो जाते हैं. न सिर्फ मोहल्लों की गलियां, बल्कि हाईवे तक पानी और गड्ढों की मार झेल रहे हैं. जहां-जहां निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां की सड़कें सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. शिमला बायपास रोड पर हाल ही में एक ई-रिक्शा गड्ढे में पलट गया. ईश का कहना है कि संबंधित विभागों को मानसून से पहले ही सड़कों के गड्ढों को भरने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी.
हर कदम पर खतरा
शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर उधड़ी सड़कों पर लोगों को अब तक राहत नहीं मिल सकी है. मनीष विरमानी ने तंज कसते हुए कहा, “हमारा शहर इतना स्मार्ट हो गया है कि अब सड़कों में गड्ढे नहीं, गड्ढों में सड़कें दिखती हैं.” उन्होंने बताया कि कई जगहों पर टाइल्स लगाई गई थीं, जो टूटकर और खतरनाक हो गई हैं. गड्ढों में भरे पानी की वजह से बाइक और स्कूटर सवारों को हर समय एक्सीडेंट का डर बना रहता है.
विभागीय परियोजनाएं बनी मुसीबत
स्थानीय निवासी विनोद ने बताया कि देहरादून में विद्युत विभाग, जल विभाग और अन्य एजेंसियों द्वारा विभिन्न परियोजनाओं के लिए सड़कें खोदी जाती हैं. लेकिन काम पूरा होने के बाद गड्ढों को भरने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता. ऐसे में सड़कों पर हर समय खतरा बना रहता है. उन्होंने मांग की कि सभी विभागों को आपसी तालमेल से काम करना चाहिए ताकि आम लोगों को इस परेशानी से राहत मिल सके.