फरीदाबाद. फरीदाबाद के सागरपुर गांव के किसान अब खेती के साथ-साथ मुर्गी पालन करके भी अच्छी आमदनी कमा रहे हैं. यहां के दीपक और उनके परिवार ने देसी जुगाड़ से मुर्गियों के लिए ऐसा इंतजाम किया है जिससे अंडों की बर्बादी नहीं होती और मुर्गियां आराम से अंडे दे पाती हैं.
दीपक बताते हैं कि उन्होंने कबाड़ी की दुकान से पुराने प्लास्टिक कैन खरीदे. फिर इन कैनों को काटकर मुर्गियों के रहने और अंडा देने के लिए एक खास तरह का घर तैयार किया. यह देसी जुगाड़ इस तरह से बनाया गया है कि मुर्गी आराम से उसके अंदर बैठकर अंडा देती है और फिर खुद ही बाहर आ जाती है. इससे अंडा टूटता नहीं और साफ-सुथरा रहता है.
अंडों की बर्बादी से मिली राहत
पहले जब मुर्गियां खुले में अंडे देती थीं तो कई बार अंडे फूट जाते थे या खराब हो जाते थे. अब इस नई व्यवस्था से अंडों की सुरक्षा बनी रहती है. सर्दियों में दीपक ने करीब 700 मुर्गियां पाली थीं जिनमें से रोजाना लगभग 600 अंडे निकलते थे.
हरी घास और सब्जियों से होता है चारा तैयार
दीपक बताते हैं कि मुर्गियों को वे हरी घास और मंडी से लाई गई सब्जियों के बचे हुए हिस्सों से बना चारा खिलाते हैं. जब मुर्गी पांच से छह महीने की हो जाती है तो वह अंडे देना शुरू कर देती है.
दो वैरायटी से मिल रही अच्छी कीमत
दीपक के पास दो वैरायटी की मुर्गियां हैं. कड़कनाथ और सोनाली. सोनाली मुर्गी एक महीने में लगभग 22 से 24 अंडे देती है. सोनाली के अंडों की एक ट्रे 600 रुपये में बिकती है जबकि कड़कनाथ के अंडों की ट्रे 750 रुपये तक जाती है. ये अंडे पूरी दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई होते हैं.
सुबह के समय में निकलते हैं ज्यादातर अंडे
दीपक बताते हैं कि सुबह 6 बजे से 11 बजे तक मुर्गियां ज्यादातर अंडे देती हैं. उनके द्वारा तैयार किया गया मुर्गी घर इतना आरामदायक है कि मुर्गी बिना डर के उसमें बैठती है और अंडा देकर बाहर निकल आती है.
देसी जुगाड़ बना प्रेरणा. काम को और बढ़ाने की योजना
इस देसी तरीके से न सिर्फ अंडों की सुरक्षा होती है बल्कि साफ-सफाई भी बनी रहती है. इससे दीपक को अच्छा मुनाफा मिल रहा है और अब वे इस काम को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.