February 20, 2026
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डूब रहे हैं ये 28 बड़े शहर! सैटेलाइट स्टडी में खुलासा

  • May 18, 2025
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ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसे शब्दों के बारे में हम और आप में से हर किसी ने कभी न कभी जरूर सुना होगा। वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे

डूब रहे हैं ये 28 बड़े शहर! सैटेलाइट स्टडी में खुलासा
ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसे शब्दों के बारे में हम और आप में से हर किसी ने कभी न कभी जरूर सुना होगा। वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि दुनियाभर में कई शहर आने वाले कुछ सालों में पानी के अंदर समा चुके होंगे। ऐसा ही कुछ अमेरिका में भी होने वाला है जिसके लिए वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली स्टडी पेश की है। यह स्टडी सैटेलाइट आधारित है जो खुलासा करती है कि यूनाइटेड स्टेट्स (US) के 28 शहर पानी के अंदर समाना शुरू हो चुके हैं। यह प्रक्रिया बहुत धीमे हो रही है लेकिन लगातार हो रही है। आइए जानते हैं स्टडी के बारे में विस्तार से। 

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Virginia Tech के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी जारी की है जो कहती है कि अमेरिका के 28 सबसे घनी आबादी वाले शहर लगातार पानी में समाते जा रहे हैं। Forbes की रिपोर्ट के अनुसार, इन शहरों में न्यूयॉर्क सिटी, शिकागो, डालास, और डेनवर जैसे नाम भी शामिल हैं। ये शहर प्रतिवर्ष 2mm से 10mm या, 0.08 इंच से 0.4 इंच की दर से डूबने की ओर बढ़ रहे हैं। वर्जीनिया टेक ने शहरी क्षेत्रों में प्रक्रिया की मैपिंग करने के लिए हाई रिजॉल्यूशन रडार माप का इस्तेमाल किया।

शोधकर्ताओं ने 28 शहरों में पाया कि जांचे गए प्रत्येक शहर में कम से कम 20 प्रतिशत भूमि क्षेत्र डूबता जा रहा है। और इन 28 में से 25 शहरों में 65 प्रतिशत से अधिक भूमि नीचे की ओर डूब रही है। इससे शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रणालियों के लिए आगे आने वाले समय में गंभीर खतरा पैदा होने की संभावना नजर आ रही है। यहां बाढ़ आ सकती है। तटवर्ती इलाके पानी में समा सकते हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से तबाह हो सकता है। 

Nature Cities में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, टेक्सास के शहरों में धंसने की दर सबसे अधिक है, जिसमें ह्यूस्टन सबसे अधिक प्रभावित है। ह्यूस्टन शहर का 40 प्रतिशत हिस्सा प्रति वर्ष 5mm से अधिक तेजी से धंस रहा है, और इसका 12 प्रतिशत हिस्सा प्रति वर्ष 10mm से अधिक तेजी से धंस रहा है। Leonard Ohenhen के निर्देशन में शोधकर्ताओं ने लगभग 80 प्रतिशत शहरी धंसाव को अत्यधिक भूजल दोहन से जोड़ा, जो बढ़ती शहरी आवश्यकताओं का परिणाम है। हालांकि साथ ही प्राकृतिक भूवैज्ञानिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है, लेकिन मानवीय गतिविधियाँ अब भूमि के धंसने का यहां प्रमुख कारण बन गई हैं।

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि छोटे-छोटे बदलाव भी सड़कों, पुलों, रेल सिस्टम और अन्य बुनियादी ढांचे की संरचनात्मक अखंडता को कमज़ोर कर सकते हैं। वर्जीनिया टेक में एसोसिएट प्रोफेसर मनूचेहर शिरज़ाई ने एक बयान में कहा, “यह खतरा बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है, यह नीचे से ज़मीन को खत्म कर देता है। फिर अगर आपदाएँ आती हैं, तो बहुत कम लोग इसे शुरुआती दौर में पहचान पाते हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, हालाँकि इसे कभी भी पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके संबंध में ज़्यादा निगरानी और कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है। बेहतर सैटेलाइट निगरानी, ​​ग्रांउडवाटर मैनेजमेंट में बदलाव और मज़बूत इंफ्रासट्रक्चर के निर्माण पर ज़ोर दिया जाना चाहिए।

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