कांगड़ा. जिला कांगड़ा के ज्वाली उपमंडल के साथ लगते हारचकियां के समीप प्राचीन सिद्ध गोरिया बाबा का मंदिर है, जो लोगों की आस्था का केंद्र बना है. लोग अक्सर जहां अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं. यह मंदिर 32 मील रानी ताल मार्ग पर हारचकियां से करीबन 7 किलोमीटर की दूरी पर परगोड नामक गांव में स्थित है, जो कि एक पहाड़ी पर दो बड़े-बड़े पत्थरों के नीचे बनी गुफा है, जहां साक्षात बाबा सिद्ध गोरिया निवास करते हैं. कुछ दंत कथाओं के अनुसार ऐसी मान्यता है कि सिद्ध गोरिया बाबा बड़े पत्थरों के बीच बनी गुफा में निवास करते थे तथा बाल गोपाल के साथ रहते थे. जब ग्वालों की गाय गुम हो जाती थी, तो उनको ढूंढने में सहायता किया करते थे. लोगों का मानना है कि बाबा हर प्रकार की समस्याओं को दूर करते हैं, जो भी मनुष्य सच्ची श्रद्धा के साथ बाबा से कुछ भी मांगे उसकी इच्छा निश्चित ही पूरी होती है.
बढ़ गई है मंदिर की आस्था
स्थानीय रविन्द्र बताते हैं कि उन्होंने अपने बुजुर्गों से इस मंदिर की कहानी सुनी है. जैसे उनके बुजुर्ग मंदिर का रख रखा आप करते थे. वह यहां पूरे श्रद्धा भाव से पूछ अर्चना करते थे. उसी परंपरा को निभाते हुए आगे भी इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मंदिर की आस्था में बीते कुछ सालों में बढ़ोतरी हुई है, जहां पहले यह हिमाचल तक ही सीमित था. अब दूर दराज के इलाकों से भी लोग यहां पर आते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं. बीते कुछ वर्षों में देखा गया है कि यहां पर बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है.
कई सालों से इस परंपरा को निभा रहे स्थानीय
वर्षभर मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन होता है. मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर को भव्य बनाया गया है. मनुष्य सच्ची श्रद्धा के साथ बाबा से कुछ भी मांगे तो उसकी इच्छा निश्चय ही पूरी होती है. मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा गेहूं व नमक चढ़ाया जाता है.हर वर्ष ज्येष्ठ महीने के पहले रविवार को छिंज मेले का आयोजन किया जाता था, तथा मेले के पहले दिन भंडारे का आयोजन किया जाता था. इस परंपरा को लोगों ने आज भी वैसे ही कायम रखा है. सभी लोग अपने घर से नई फसल का अन्न लेकर आते है और भंडारे का आयोजन करते हैं.