ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 में कब है? अभी नोट कर लीजिए तारीख और शुभ मुहूर्त
- April 28, 2025
- 0
Jyeshtha Purnima 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का खास महत्व है. ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस
Jyeshtha Purnima 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का खास महत्व है. ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस
Jyeshtha Purnima 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का खास महत्व है. ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस पावन दिन पवित्र नदियों में स्नान करना और जरूरतमंदों को दान देना बहुत पुण्यकारी माना जाता है. माना जाता है कि इन उपायों से शांति और समृद्धि प्राप्त होती है. इस दिन महिलाएं उपवासी रहती हैं और वट (बड़) के पेड़ के चारों ओर धागा लपेटती हैं. इसी कारण इसे वट सावित्री पूर्णिमा या वट पूर्णिमा भी कहा जाता है. ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 में 11 जून को मनाई जाएगी. ज्योतिषाचार्य धर्मेंद्र दीक्षित से जानते हैं शुभ मुहूर्त के बारे में.
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 10 जून को सुबह 11:35 बजे शुरू होगी. जबकि 11 जून को दोपहर 1:13 बजे समाप्त होगी. इसलिए ज्येष्ठ पूर्णिमा 11 जून 2025 को मनाई जाएगी.
ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर चंद्रमा की पूजा करने से कुंडली में चंद्र दोष दूर होता है. कुंडली में अगर चंद्र खराब स्थिति में हो या उसकी दशा चल रही हो तो उसके प्रभाव में भी कमी आती है. इस दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और धन का दान करना भी बेहद शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है. इस दिन गंगा नदी में स्नान करना भी बहुत शुभ माना जाता है. साथ ही, यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है.
ये भी पढ़ें- Sita Navami 2025 Daan: सीता नवमी पर करें इन चीजों का दान, खुशियों से भर जाएगा घर, हर मनोकामना होगी पूरी!
विवाहित महिलाओं के लिए खास महत्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा का उपवासी व्रत विवाहित महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि इसे करने से उन्हें अच्छे भाग्य और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है. साथ ही, इस दिन के उपव्रत और पूजा से सास-ससुर से अच्छे रिश्ते भी बनते हैं.
सावित्री और सत्यवान की कहानी
यह व्रत विशेष रूप से सावित्री और सत्यवान की प्रसिद्ध कहानी से जुड़ा हुआ है, जो प्रेम, भक्ति और अडिग विश्वास का प्रतीक है. पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री एक निष्ठावान पत्नी थीं जिनकी भक्ति और समर्पण ने यमराज (मृत्यु के देवता) को भी अपने पति की जान वापस देने के लिए राजी कर लिया. ज्येष्ठ पूर्णिमा का मुख्य आधार सावित्री और सत्यवान की कथा है. सावित्री, एक राजकुमारी, जो अपनी निष्ठा और बुद्धिमता के लिए जानी जाती थी, ने सत्यवान, जो एक साधारण लेकिन सच्चे पुरुष थे, को अपना पति चुना. एक ऋषि ने यह भविष्यवाणी की थी कि सत्यवान की मृत्यु एक वर्ष के भीतर हो जाएगी, फिर भी सावित्री ने उनका साथ नहीं छोड़ा और उनसे विवाह किया.
ये भी पढ़ें- Samudrik Shastra: आपकी आंखों के रंग में छुपे होते हैं जिंदगी से जुड़े राज, जानें कैसी आइज़ वाले होते हैं लकी!
जैसा कि भविष्यवाणी में था, सत्यवान की मृत्यु हो गई, लेकिन सावित्री की भक्ति नहीं हिली. उन्होंने यमराज का पीछा किया जब वह सत्यवान की आत्मा लेकर जा रहे थे और उनसे गहरी बातचीत की. यमराज उनके दृढ़ निश्चय और सत्यनिष्ठा से प्रभावित हुए और उन्हें एक वरदान दिया, जिससे सावित्री ने अपने पति की जिंदगी वापस पा ली. यह कहानी भक्ति और प्रेम की मृत्यु पर विजय को दर्शाती है.
