राजनांदगांव. जिले में किसानों ने फसल चक्र परिवर्तन के तहत मक्के की खेती की और इससे उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ. कृषि विभाग ने धान के बदले दलहन और तिलहन फसलों के प्रति किसानों को जागरूक किया था. जिले में घटते जलस्तर को देखते हुए ग्रीष्मकालीन धान की जगह मक्का, दलहन, तिलहन, सब्जियों और अन्य कम जल की आवश्यकता वाली फसलों को प्रोत्साहित किया गया. जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने जल रक्षा मिशन के तहत मक्के की खेती को बढ़ावा दिया, जिससे किसानों को लाभ मिला.
400 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्के की खेती के लिए बीज प्रदान
इस वर्ष कई बड़े किसानों ने मक्के की फसल लगाई. खरीफ 2024 में राजाराम मेज प्रोडक्ट लिमिटेड ने 400 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्के की खेती के लिए बीज प्रदान किया. रबी 2024-25 में एबीस ने 290 कृषकों को 290 एकड़ और पॉपकॉर्न कंपनी ने 373 कृषकों को 592 एकड़ क्षेत्र में बीज प्रदान कर मक्के की खेती को लाभकारी फसल के रूप में प्रचारित किया.
जल रक्षा मिशन के तहत मक्के की खेती को बढ़ावा
जिले में जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. किसान अब गर्मी में धान की खेती छोड़कर मक्का, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं और इससे लाभ कमा रहे हैं. जिला प्रशासन ने किसानों को इसके लिए जागरूक किया है. धान की फसल में पानी की खपत अधिक होती है, जिससे भूजल स्तर में गिरावट आ रही थी. कई स्थानों पर नलकूपों में पानी आना बंद हो गया था. इसे देखते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने जल रक्षा मिशन के तहत मक्के की खेती को बढ़ावा दिया और लोगों को इसके प्रति जागरूक किया. लोग अब धान के बदले अन्य फसलें भी लगा रहे हैं.