January 29, 2026
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‘चौकीदार चोर’ से ‘मौत का सौदागर’ तक..PM मोदी ने हर गाली को बनाया जीत का हथियार

  • August 31, 2025
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Last Updated:August 31, 2025, 17:16 IST PM Narendra Modi Insult : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्द और आलोचनाएं कोई नई बात नहीं, लेकिन हर बार उन्होंने इनका

‘चौकीदार चोर’ से ‘मौत का सौदागर’ तक..PM मोदी ने हर गाली को बनाया जीत का हथियार

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PM Narendra Modi Insult : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्द और आलोचनाएं कोई नई बात नहीं, लेकिन हर बार उन्होंने इनका जवाब अपनी सियासी चतुराई और काम से दिया है. राहुल गांधी के ‘चौकीदार चोर है’ से लेकर सोन…और पढ़ें

‘चौकीदार चोर’ से ‘मौत का सौदागर’ तक..PM मोदी ने हर गाली को बनाया जीत का हथियारPM मोदी ने अपने हर अपमान से बनाई सियासी जीत की सीढ़ी
पटना. विपक्षी मुझे गाली देते हैं तो देने दीजिए… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी यह बात कहते है तो उनकी आंखों में एक चमक भी दिखती है. ऐसा इसलिये कि विरोधियों की यह ‘कमजोरी’ पीएम मोदी की सियासी जीत का रास्ता आसान बना देती है.दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सियासत के ऐसे किरदार हैं के तौर पर स्थापित हो चुके हैं जो अपने ऊपर हो रहे हमलों पर पलटवार बहुत जोरदार करते हैं. उनकी वाणी में तंज और व्यंग्य की ऐसी भाषा होती है जो केवल विरोधियों को अपने निशाने पर ही नहीं लेते, बल्कि उनके नैरेटिव को धराशायी कर देते हैं. प्रधानमंत्री मोदी की अपनी खास राजनीतिक शैली में प्राय: अपने विरोधियों पर तीखे हमले करते हैं और अक्सर अपने विरोधियों को घेरते हुए उनकी कमजोरियों को उजागर कर अपने लिए सियासी जीत का हथियार बना लेते हैं. एक बार फिर ऐसा ही सीन बिहार में बन रहा है जब कांग्रेस के ‘गाली-नामा’ में एक और अध्याय जुड़ गया है. बिहार के दरभंगा में राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा‘ के दौरान पीएम मोदी और उनकी मां के खिलाफ अपशब्दों के बाद भी बीजेपी ने इस मुद्दे को उठा लिया है. अब बीजेपी के तेवर आक्रामक हैं और सियासत के जानकारों की नजर में पीएम मोदी की आंखों में ‘जीत की चमक’ आ गई है!

ऐसा इसलिए कि विरोधी अपनी कमजोर पिच पर हैं और वह बीजेपी के ट्रैप में आने के लिए आतुर होते दिख रहे हैं. ऐसे में पीएम मोदी की वो पुरानी बात सबसे जेहन में उभर आई है जब विरोधियों के उनको गाली देने पर उन्होंने कहा था कि- विपक्षी मुझे गाली देते हैं तो देने दीजिये, वह ‘गालीप्रूफ’ हो चुके हैं. 13 नवंबर 2022 को तेलंगाना के हैदराबाद में एक जनसभा के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि वे ‘रोजाना दो-तीन किलो गाली खाते हैं’ और यह उनके लिए ‘पोषक तत्वों’ में बदल जाती है. इसी तरह 1 दिसंबर 2022 को गुजरात के कलोल में एक चुनावी रैली में उन्होंने कहा था, ‘जितना कीचड़ उछालोगे, उतना कमल खिलेगा’. जाहिर है पीएम मोदी अपने बयानों से यह संकेत देते हैं कि विपक्ष की गालियां और हमले उनकी पार्टी (बीजेपी) को सियासी तौर पर और मजबूत करते हैं.

आलोचना नजरअंदाज, काम पर फोकस

दरअसल, बीते ढाई दशक की राजनीति में ऐसे कई उदाहरण हैं जब पीएम मोदी ने हमेशा ही अपने अपमान को अपनी सियासी जीत की सीढ़ी बना ली है. एक उदाहरण तो सबको याद ही है जब वर्ष 2019 के लोकसभाचुनाव में राहुल गांधी ने ‘चौकीदार चोर है’ का नैरेटिव गढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पीएम मोदी ने ‘मैं हूं चौकीदार’ कैंपेन चलाकर उनके नैरेटिव की हवा निकाल दी और 2019 लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की. पीएम मोदी का यह कहना कि ‘गालियां देने दीजिए’ उनकी उस छवि को मजबूत करता है जिसमें वे खुद को जनता का सेवक और विपक्ष के हमलों से ऊपर बताते हैं. वे कहते हैं कि ऐसी गालियां उनके काम को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि जनता का समर्थन बढ़ाती हैं. ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने हैं जब पीएम मोदी अपने विरोधियों के दबाव में नहीं आते हैं और अपने विरोधियों की आलोचना और अपमानजनक टिप्पणियों का जवाब देते हैं और अपनी नीतियों और कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित रखते हैं, और जनता के बीच अपने लिए एक अलग ही पॉजिटिव नैरेटिव बना लेते हैं.

हर गाली को बनाया जीत का हथियार

  • ‘चौकीदार चोर है’ का जवाब-‘मैं हूं चौकीदार’- राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव में राफेल डील को लेकर ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया. पीएम मोदी ने इसे पलटते हुए ‘मैं हूं चौकीदार’ कैंपेन शुरू किया. लाखों समर्थकों ने सोशल मीडिया पर #MainBhiChowkidar ट्रेंड चलाया. नतीजा बीजेपी ने 303 सीटों के साथ प्रचंड जीत हासिल की और राहुल की अमेठी सीट भी हार गई. यह मोदी की सियासी चतुराई का सबसे बड़ा उदाहरण है.
  • ‘नीच’ टिप्पणी का पलटवार- वर्ष 2017 में मणिशंकर अय्यर ने मोदी को ‘नीच’ कहा. पीएम मोदी ने इसे अपनी OBC पृष्ठभूमि से जोड़कर गुजरात चुनाव में ‘गरीब का अपमान’ का मुद्दा बनाया. उन्होंने कहा, ‘मैं नीच हूं, लेकिन मेरी नीचता देश सेवा में है.’ बीजेपी ने 99 सीटें जीतीं, और कांग्रेस की ‘नीच’ टिप्पणी उलटी पड़ गई. यह मोदी की सियासी रणनीति का एक और नमूना था.
  • ‘राक्षस राज’ और ‘रावण’ टिप्पणी का जवाब- वर्ष 2017 में दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार को ‘राक्षस राज’ और मोदी को ‘रावण’ कहा. पीएम मोदी ने इसका जवाब अपने काम से दिया। GST और डिजिटल इंडिया जैसे कदमों को जनता तक ले गए. उसी साल यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी की बंपर जीत ने दिग्विजय के बयान को बेमानी साबित कर दिया. पीएम मोदी की सादगी और काम ने जनता का दिल जीता.
  • ‘गंगू तेली’ का तंज और सियासी उलटफेर- वर्ष 2017 में गुलाम नबी आजाद ने मोदी को ‘गंगू तेली’ कहकर तंज कसा. पीएम मोदी ने इसे अपनी साधारण पृष्ठभूमि से जोड़कर जनता के बीच सहानुभूति बटोरी. गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की जीत ने दिखाया कि जनता उनकी मेहनत और विनम्रता को महत्व देती है. गुलाम नबी आजाद का बयान कांग्रेस के लिए भारी पड़ गया.
  • ‘टुकड़े-टुकड़े’ धमकी का जवाब- वर्ष 2017 में इमरान मसूद ने कहा, हम मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर देंगे. कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया, लेकिन मोदी ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से जोड़कर जनता को लामबंद किया. वर्ष 2019 में बीजेपी की 303 सीटों की जीत और पुलवामा हमले के बाद बालाकोट स्ट्राइक ने उनकी मजबूत छवि बनाई. इमरान मसूद का बयान बीजेपी के लिए सियासी हथियार बन गया.
  • ‘मौत का सौदागर’ से गुजरात की जीत- वर्ष 2007 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान सोनिया गांधी ने मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा, 2002 दंगों का हवाला देकर. पीएम मोदी ने इसका जवाब भावनात्मक भाषणों और विकास के एजेंडे से दिया. उन्होंने गुजरात की जनता से ‘गुजराती अस्मिता’ का सवाल जोड़ा. नतीजा यह रहा कि बीजेपी ने 117 सीटें जीतीं और सीएम मोदी ने गुजरात में अपनी सियासी पकड़ मजबूत कर ली.
    पीएम नरेंद्र मोदी अपने सियासी दुश्मनों को अपने ऊपर अभद्र टिप्पणी को हमेशा ही दरकिनार कर देते हैं और अपने कार्यों पर केंद्रित रहते हैं.

    सियासी चतुराई के 9 उदाहरण

  1. 2014 चुनाव में ‘नरेंद्र मोदी को पीएम नहीं बनने देंगे’- कई विपक्षी पार्टियों ने कहा था कि नरेंद्र मोदी को पीएम नहीं बनने देंगे. तत्कालीन गुजरा सीएम मोदी ने इसे चुनौती के रूप में लिया और अपनी चुनावी सफलता के साथ भारी बहुमत से सरकार बनाई.
  2. ‘अन्ना हजारे आंदोलन में मोदी को जगह नहीं- अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में कई लोगों ने मोदी को असफल बताया, लेकिन बाद में गुजरात सीएम मोदी ने खुद को भ्रष्टाचार विरोधी नेता के रूप में स्थापित किया और 2014 में बड़ी जीत हासिल की.
  3. गुजरात दंगों का मुद्दा- वर्ष 2002 के गुजरात दंगों का मुद्दा बार-बार विपक्षी दलों द्वारा उठाया गया, लेकिन पीएम मोदी ने इसे अपने पक्ष में मोड़ते हुए कहा कि यह मुद्दा उनकी छवि खराब करने के लिए उठाया जा रहा है.
  4. मोदी तेरी कब्र खुदेगी- वर्ष 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान, समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की, लेकिन पीएम मोदी ने इसे अपने पक्ष में मोड़ते हुए कहा कि यह टिप्पणी समाजवादी पार्टी की मानसिकता को दर्शाती है.
  5. अभद्र टिप्पणी- वर्ष 2016 में पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के बयान के बाद, पीएम मोदी ने इसे अपने पक्ष में मोड़ते हुए कहा कि यह बयान कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है.
  6. नोटबंदी का विरोध- वर्ष 2016 में नोटबंदी के फैसले का विपक्षी दलों ने विरोध किया, लेकिन पीएम मोदी ने इसे अपने पक्ष में मोड़ते हुए कहा कि यह फैसला भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है.
  7. नीच इंसान- वर्ष 2018 में कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी के खिलाफ पीएम मोदी की टिप्पणी ‘नीच इंसान’ को लेकर विवाद हुआ, लेकिन पीएम मोदी ने इसे अपने पक्ष में मोड़ते हुए कहा कि यह टिप्पणी रेणुका चौधरी के बयान के जवाब में थी.
  8. ‘मोदी के पास दूरदर्शिता नहीं है’– कई बार विपक्ष ने मोदी की आर्थिक नीतियों और विजन पर सवाल उठाए, लेकिन मोदी ने बड़े सुधार जैसे नोटबंदी, GST लागू करना और मेक इन इंडिया अभियान शुरू कर अपने विजन को साबित किया.
  9. COVID-19 प्रबंधन के दौरान आलोचना- महामारी के शुरुआती दौर में कई आलोचनाएं आईं, लेकिन मोदी ने बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन अभियान और आर्थिक राहत के कदम उठाकर आलोचनाओं को कम किया.

सियासी सबक: अपमान से अवसर तक

पीएम मोदी ने हर बार अपमान को अवसर में बदला. उनकी रणनीति रही- आलोचना को नजरअंदाज कर, काम पर फोकस करना. राम मंदिर, आर्टिकल 370 की समाप्ति और नोटबंदी जैसे कदम उनकी लोकप्रियता का सबूत हैं. कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस या फिर विरोधियों के अपमानजनक बयानों को हमेशा अपनी जीत की सीढ़ी बना लिया. पीएम मोदी ने अपने ऊपर हुए हर हमले का जवाब अपनी सियासी चतुराई और काम से दिया.

Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट… और पढ़ें

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