February 20, 2026
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घर है कि म्यूजियम? 'कबाड़ से जुगाड़' का कलेक्शन देख रह जाएंगे हक्के-बक्के

  • May 21, 2025
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Last Updated:May 21, 2025, 00:22 IST Bhopal News: देवेंद्र प्रकाश तिवारी ने लोकल 18 से कहा कि वह अपने शौक के तौर पर कबाड़ से जुगाड़ के तहत

घर है कि म्यूजियम? 'कबाड़ से जुगाड़' का कलेक्शन देख रह जाएंगे हक्के-बक्के

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Bhopal News: देवेंद्र प्रकाश तिवारी ने लोकल 18 से कहा कि वह अपने शौक के तौर पर कबाड़ से जुगाड़ के तहत मिनिएचर मॉडल तैयार करते हैं. घर में मशीन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान से निकले अलग-अलग तरह के पार्ट्स को किसी …और पढ़ें

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देवेंद्र

देवेंद्र प्रकाश तिवारी एक विशेष कलात्मक अभिरुचि के लिए पहचाने जाते हैं.

भोपाल. भारत सरकार के उपक्रम कोल इंडिया लिमिटेड से सेवानिवृत्त देवेंद्र प्रकाश तिवारी एक विशेष कलात्मक अभिरुचि के लिए पहचाने जाते हैं. वे हर तरह की बेकार या अनुपयोगी हो चुकी वस्तुओं के मेटल, प्लास्टिक पार्ट्स और ई-वेस्ट से बड़े-बड़े तकनीकी उपकरणों, यंत्रों, वाहनों आदि के मिनिएचर मॉडल बनाते हैं. ये इस कला के माध्यम से ई-वेस्ट के कलात्मक उपयोग एवं प्रबंधन के प्रति छात्रों को जागरूक कर रहे हैं. लोकल 18 के माध्यम से जानिए उनके इस अनोखे सफर की शुरुआत कैसे हुई.

देवेंद्र प्रकाश तिवारी ने लोकल 18 से बात करते हुए कहा, ‘मैं अपने शौक के तौर पर कबाड़ से जुगाड़ के तहत मिनिएचर मॉडल तैयार करता हूं. अपने घर में मशीन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान से निकले अलग-अलग तरह के पार्ट्स को किसी नए रूप में बनाया जाता है. इनको बनाने में किसी भी तरह की कटाई-छटाई नहीं होती है और न ही इसमें किसी तरह का खर्च आता है. यह सभी उपकरण कबाड़ से सामान निकालकर बनाए जाते हैं.’

देवेंद्र तिवारी का घर बना संग्रहालय
देवेंद्र बताते हैं कि इन यूनिक मिनिएचर मॉडल से इनका घर एक संग्रहालय बन चुका है. गैर तकनीकी पृष्ठभूमि के बावजूद इनके बनाए सैन्य उपकरणों और अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी मॉडल तकनीकी विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम हैं. रीजनल साइंस सेंटर, भोपाल, मुंबई और इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के भोपाल, फरीदाबाद और गोहाटी जैसे विश्वस्तरीय आयोजनों में प्रदर्शनी को मिली सराहना इसका प्रमाण है.

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज
मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा विकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित कबाड़ से जुगाड़ प्रतियोगिता में उन्हें प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया था. पिछले 40 साल से अपने शौक को जारी रखते हुए डीपी तिवारी तीन बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं. उन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा साल 2013 में टॉप 100 टैलेंट में शामिल किया गया था. वह इस कला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं.

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