किसान ने नेट हाउस में उगाए खीरे, 70% सब्सिडी से कमाया लाखों, बन गए मिसाल!
- April 29, 2025
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Last Updated:April 29, 2025, 00:32 IST Cucumber Farming: अरावली जिले के किसान प्रणव नानजीभाई तरार ने नेट हाउस में खीरे की खेती कर 70% सब्सिडी से लाखों कमाए.
Last Updated:April 29, 2025, 00:32 IST Cucumber Farming: अरावली जिले के किसान प्रणव नानजीभाई तरार ने नेट हाउस में खीरे की खेती कर 70% सब्सिडी से लाखों कमाए.
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नेट हाउस में खीरे की खेती से कमाए लाखों रुपये
हाइलाइट्स
अरावली: गुजरात के अरावली जिले के मेघरज तालुका के कसाना गांव के किसान प्रणव नानजीभाई तरार ने नई खेती की पद्धति अपनाकर बागवानी खेती का नया उदाहरण पेश किया है. पारंपरिक खेती की सीमाओं को पार करते हुए, प्रणवभाई ने नेट हाउस में खीरे की खेती शुरू की, जिससे वे लाखों रुपये कमा रहे हैं. यह सफलता न केवल उनके लिए बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन गई है.
अरावली जिले के मेघरज तालुका के कसाना गांव के 28 वर्षीय युवा किसान प्रणव नानजीभाई तरार, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, वे नौकरी की तैयारी के साथ-साथ खेती भी कर रहे हैं. एक एकड़ जमीन में खीरे की खेती शुरू की है और उन्हें उम्मीद है कि इस खेती से उन्हें अच्छा उत्पादन मिलेगा.
नेट हाउस में खीरे की खेती के कई फायदे
लोकल 18 से बात करते हुए प्रणवभाई ने बताया कि नेट हाउस में खीरे की खेती के कई फायदे हैं. नेट हाउस की संरचना खेती को प्राकृतिक आपदाओं जैसे भारी बारिश, तीव्र गर्मी और कीटों के हमलों से सुरक्षित रखती है. इस तकनीक से नियंत्रित वातावरण में उगाए गए खीरे की गुणवत्ता बेहतरीन होती है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. इसके अलावा, यह खेती पारंपरिक खेती की तुलना में कम पानी और कम खर्च में अधिक उत्पादन देती है.
नेट हाउस बनाने के लिए 75% सब्सिडी मिली है
प्रणवभाई बताते हैं कि इस खेती में सफलता पाने के लिए उन्हें गुजरात सरकार के बागवानी विभाग की सब्सिडी योजना से बहुत मदद मिली है. नेट हाउस बनाने के लिए उन्हें आर्थिक सहायता मिली, जिससे शुरुआती निवेश का बोझ कम हुआ. इस सब्सिडी ने उन्हें आधुनिक खेती की तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है. बागवानी विभाग से उन्हें नेट हाउस बनाने के लिए 75% सब्सिडी मिली है. बागवानी विभाग द्वारा दी गई ट्रेनिंग और मार्गदर्शन से उन्होंने नई खेती पद्धतियां सीखी, जिसका उन्होंने प्रभावी ढंग से उपयोग किया है.
वर्तमान औसत भाव 20 से 25 रुपये है
पारंपरिक खेती में मौसम की अनिश्चितता और कम मुनाफे का सामना करने वाले किसानों के लिए नेट हाउस जैसी आधुनिक पद्धतियों ने नई उम्मीद जगाई है. युवा किसान प्रणवभाई ने पहली बार खीरे की खेती की है, जो तीन से चार महीने की फसल मानी जाती है और बाजार में औसतन 20 रुपये प्रति किलो के भाव मिलते हैं. इस खीरे की खेती में उन्होंने लगभग 30% से 35% खर्च किया है और 60% से 65% मुनाफे की उम्मीद की है. अब तक उन्होंने 12 टन खीरे की मार्केट यार्ड में बिक्री की है, जिसका वर्तमान औसत भाव 20 से 25 रुपये है. पूरे वावेतर से उन्हें 35 से 40 टन खीरे का उत्पादन होने की उम्मीद है, यानी औसत इन भावों पर, उन्हें छह लाख रुपये तक की आय हो सकती है.
