शाहजहांपुर : शाहजहांपुर में अब किसान पारंपरिक खेती के बजाय बागवानी की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि बागवानी से किसानों को अन्य फसलों की तुलना में अधिक मुनाफा मिलता है. बाजार में फल और सब्जियों की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होती है. सरकार भी किसानों को बागवानी के लिए प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए कई योजनाएं चला रही है. आधुनिक तकनीकों का उपयोग बागवानी में उत्पादन को और बढ़ा रहा है. सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक बार बाग लगाने के बाद किसान लंबे समय तक इससे आय प्राप्त कर सकते हैं.
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत किसानों को बाग लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इस योजना के अंतर्गत किसान अमरूद, आम, लीची, ड्रैगन फ्रूट और अन्य फलदार पौधे लगा सकते हैं. सरकार इन पौधों को लगाने के लिए किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है. शाहजहांपुर के किसानों में अमरूद की बागवानी को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है. जो किसान विभाग की सहायता से अमरूद का बाग लगाना चाहते हैं, वे अनुदान प्राप्त करने के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं.
कैसे करें आवेदन?
किसान राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उद्यान विभाग की वेबसाइट पर जाकर या सीधे कार्यालय में संपर्क करके आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे, जिनमें खेत की खतौनी, किसान का आधार कार्ड, बैंक पासबुक और दो पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं. आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से निशुल्क है. चयनित किसानों को पहले वर्ष 11738 रुपये का अनुदान मिलेगा. इसी तरह, दूसरे और तीसरे वर्ष भी अनुदान की राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी.
कम एरिया में लगाएं ज्यादा पौधे
उद्यान विभाग इस बार किसानों को हाई डेंसिटी (घनी) बागवानी करने के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रहा है.इस तकनीक में कम जगह पर अधिक पौधे लगाए जाते हैं, जिससे किसानों को कम क्षेत्रफल में भी अधिक उत्पादन मिल पाता है.
ऐसे करें पानी की बचत
बागवानी के साथ-साथ जल संरक्षण पर भी विभाग का पूरा ध्यान है.किसानों को ड्रिप सिंचाई (बूंद-बूंद सिंचाई) प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.इस सिंचाई प्रणाली को लगाने के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों को 90% तक और सामान्य वर्ग के किसानों को 80% तक का अनुदान दिया जा रहा है.