इतिहास का रहस्यमय स्थल, शंकराचार्य का शरीर 6 महीने इस गुफा में पड़ा था! जानें
- May 9, 2025
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खरगोन. आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़ा हुआ एक ऐतिहासिक और रहस्यमय स्थल खरगोन जिले में स्थित है. यहां एक छोटी सी गुफा है, जिसमें कई राज समेटे हुए
खरगोन. आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़ा हुआ एक ऐतिहासिक और रहस्यमय स्थल खरगोन जिले में स्थित है. यहां एक छोटी सी गुफा है, जिसमें कई राज समेटे हुए
खरगोन. आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़ा हुआ एक ऐतिहासिक और रहस्यमय स्थल खरगोन जिले में स्थित है. यहां एक छोटी सी गुफा है, जिसमें कई राज समेटे हुए हैं. कहा जाता है कि जब शंकराचार्य ने परकाया प्रवेश किया था, तब उनका मृत (स्थूल) शरीर इस गुफा में 6 महीने तक उनके शिष्यों की निगरानी में रखा गया था.
शिवलिंग की स्थापना और गुफा का महत्व
इस गुफा में एक शिवलिंग भी स्थापित है, जिसे विश्व का पहला शिवलिंग माना जाता है. किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ इस शिवलिंग की स्थापना एक ऋषि द्वारा दिए गए श्राप से मुक्ति पाने के लिए की थी. वर्तमान में यह क्षेत्र श्री गुप्तेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है, जो नर्मदा नदी के तट पर स्थित मंडलेश्वर में स्थित है. मध्य प्रदेश सरकार ने इसे पवित्र स्थल भी घोषित किया है.
42 दिन चला शास्त्रार्थ
आद्य गुरु शंकराचार्य धर्म के सबसे बड़े प्रचारक माने जाते हैं. कम आयु में ही उन्होंने देशभर में घूम-घूम कर विद्वानों के साथ शास्त्रार्थ किया और धर्म के प्रचार के साथ ही चार प्रमुख मठों की स्थापना भी की. शंकराचार्य नर्मदा नदी के किनारे बसे पवित्र नगरी मंडलेश्वर भी पहुंचे थे, जहां उनके और मंडन मिश्र के बीच विश्व प्रसिद्ध शास्त्रार्थ हुआ, जो 42 दिन तक चला.
मंडन मिश्र से मिलने माहिष्मति आए शंकराचार्य
मंडलेश्वर, जो पहले माहिष्मति का हिस्सा था, मंडन मिश्र की कर्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है. शंकराचार्य ने यहां मंडन मिश्र से शास्त्रार्थ किया. मंडन मिश्र की पत्नी भारती देवी ने शंकराचार्य से शास्त्रार्थ किया और शंकराचार्य ब्रह्मचारी होने के कारण कुछ सवालों का जवाब नहीं दे पाए. इसके बाद उन्होंने कश्मीर के राजा अमरक के मृत शरीर में परकाया प्रवेश किया.
छह महीने तक गुफा में रखा गया मृत शरीर
राजा के शरीर में प्रवेश करने के बाद शंकराचार्य ने कामशास्त्र का ज्ञान प्राप्त किया. छह महीने बाद उन्होंने पुनः अपने शरीर में प्रवेश किया और भारती देवी के सवालों का जवाब दिया. इस दौरान उनका मृत शरीर मंडलेश्वर के गुप्तेश्वर मंदिर की गुफा में शिष्यों की निगरानी में रखा गया था.
वर्तमान शंकराचार्य और श्रद्धालुओं ने की पुष्टि
वर्तमान शंकराचार्य और अन्य साधु-संत इस ऐतिहासिक स्थल के दर्शन करने आए हैं. उन्होंने यहां शंकराचार्य की ऊर्जा महसूस की और दावा किया कि परकाया प्रवेश के दौरान उनका शरीर यहीं था. इसके बारे में कहा जाता है कि बुरे आचरण या गलत नियत से आने वाला कोई भी व्यक्ति रात को यहां नहीं रुक पाता है.
गुप्तेश्वर मंदिर की उपेक्षा
हालांकि यह ऐतिहासिक धरोहर अब भी अपने मूल स्वरूप में मौजूद है, लेकिन शासन-प्रशासन की उपेक्षा के कारण यह उपेक्षित हो रहा है. सरकार ने इसे पवित्र स्थल घोषित किया है, लेकिन संरक्षण, सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं. हर साल बारिश में यह मंदिर नर्मदा के बैकवॉटर में डूब जाता है, जिससे लोग दर्शन लाभ नहीं ले पाते.
