India Pakistan Border Beating the Retreat Start Date: सात मई को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान को जमकर उधेड़ दिया था. चुन-चुनकर आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए. इसके साथ ही बॉर्डर पर बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच होने वाली पारंपरिक बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी को भी बंद कर दिया गया था. सीमा पर तनाव के बीच करीब दो सपताह तक इसके बंद रहने के बाद आज यानी मंगलवार से इसे फिर से शुरू किया जा रहा है. पंजाब के अटारी-वाघा और फिरोजपुर के हुसैनीवाला बॉर्डर पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी फिर से शुरू होने जा रही. पाकिस्तान से टेंशन के बीच इसमें कुछ बदलाव भी किए गए हैं.
इस बदलाव के साथ होगी परेड
12 दिन बाद आज से यह समारोह फिर से शुरू हो रहा, लेकिन कुछ बदलावों के साथ परेड का आयोजन होगा. भारतीय पक्ष ने फैसला किया है कि परेड के दौरान गेट बंद रहेंगे और BSF और पाकिस्तानी रेंजर्स के बीच पारंपरिक हस्तक्षेप नहीं होगा. यह निर्णय सुरक्षा को प्राथमिकता देने और तनावपूर्ण माहौल में सतर्कता बनाए रखने के लिए लिया गया.
क्या होती है सीमा पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी
बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी भारत-पाकिस्तान सीमा के बीच एक प्रतिष्ठित सैन्य परंपरा . इस परंपरा के तहत सीमा पर एक समारोह का आयोजन किया जाता . साल 1959 से रोजाना सूर्यादय के तुरंत बाद और सूर्यास्त से पहले आयोजित किया जाता . इस परंपरा के तहत बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच एक परेड का आयोजन होता . इस परेड के तरत दोनों देश सीमा पर अपने-अपने झंडे को सुबह की परेड में चढ़ाते हैं और रात के वक्त पूरे सम्मान के साथ उतार लेते हैं.
परेड में क्या-कुछ होता है?
समारोह में जवानों की हाई-किक्स, जोशीले सलामी, और दोनों पक्षों के सैनिकों द्वारा तालमेल भरी परेड शामिल होती है, जो दोनों देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता और भाईचारे का प्रतीक. यह आयोजन हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है, जो देशभक्ति के उत्साह के साथ भारत माता की जय और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं. यह समारोह न केवल सैन्य अनुशासन का प्रदर्शन है बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी रखता . फिरोजपुर के हुसैनीवाला बॉर्डर पर भी समान समारोह होता है, जो शहीद भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता.