नई दिल्ली: दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में इस हफ्ते भारत और पाकिस्तान के बड़े राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल एक ही समय पर मौजूद रहेंगे. भारत की ओर से ऑल-पार्टी डेलिगेशन की अगुवाई कर रहे हैं कांग्रेस सांसद शशि थरूर मौजूद रहेंगे. वहीं पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी मौजूद रहेंगे. दोनों ही पक्ष अमेरिकी सांसदों, नीति-निर्माताओं और थिंक टैंकों से मुलाकात कर अपने-अपने देश का पक्ष मजबूती से रखने की कोशिश करेंगे.
भारत का प्रतिनिधिमंडल ब्राजील, पनामा, कोलंबिया और गयाना की यात्रा के बाद 3 जून को वाशिंगटन पहुंचेगा. इसमें बीजेपी सांसद भुवनेश्वर कलिता, शिवसेना नेता मिलिंद देवड़ा और पूर्व अमेरिकी राजदूत तरणजीत सिंह संधू शामिल हैं. यह टीम न्यूयॉर्क से अपनी अमेरिकी यात्रा की शुरुआत पहले ही कर चुकी है.
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पाकिस्तान ने भी भेजा अपना डेलिगेशन
वहीं पाकिस्तान का 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 2 जून से न्यूयॉर्क और वाशिंगटन में कार्यक्रमों में भाग ले रहा है. इसमें हिना रब्बानी खार, शेरी रहमान, खुर्रम दस्तगीर और पूर्व विदेश सचिव जैसे अनुभवी चेहरे शामिल हैं. यह डेलिगेशन लंदन और ब्रसेल्स भी जाएगा.
थरूर पहले ही दिखा चुके हैं तेवर
भारत का उद्देश्य स्पष्ट है- ऑपरेशन सिंदूर के बाद वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की आतंक से जुड़ी छवि को उजागर करना और भारत की जवाबी कार्रवाई को जरूरी ठहराना. थरूर ने पहले ही न्यूयॉर्क में कहा था कि पाकिस्तान को अब आतंकवाद के समर्थन की भारी कीमत चुकानी होगी.
पाकिस्तान की सहानुभूति बटोरने की कोशिश
पाकिस्तान भारत की इस राजनयिक रणनीति को काटने के लिए दुनिया में सहानुभूति जुटाने का प्रयास कर रहा है. उसकी यह कूटनीतिक दौड़ भारत के सात प्रतिनिधिमंडलों की यात्रा की प्रतिक्रिया मानी जा रही है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों प्रतिनिधिमंडल एक ही शहर में आमने-सामने आएंगे या नहीं. लेकिन थरूर और भुट्टो जैसे नेता जहां भी होंगे वहां भारत-पाक टकराव का माहौल जरूर बनेगा. यह ‘कूटनीतिक रणभूमि’ एक बार फिर दिखा सकती है कि आतंकवाद और कूटनीति के बीच भारत और पाकिस्तान के रास्ते कितने अलग हैं.