February 19, 2026
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“अब चैन नहीं बचा…” बेटे की हरकतों से टूटे बुजुर्ग माता-पिता, कोर्ट ने कहा

  • May 5, 2025
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Last Updated:May 05, 2025, 15:22 IST Parental Rights Over Property in India: सागर में रिटायर्ड टीआई और उनकी पत्नी ने बेटे-बहू से परेशान होकर उन्हें घर से बेदखल

“अब चैन नहीं बचा…” बेटे की हरकतों से टूटे बुजुर्ग माता-पिता, कोर्ट ने कहा

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Parental Rights Over Property in India: सागर में रिटायर्ड टीआई और उनकी पत्नी ने बेटे-बहू से परेशान होकर उन्हें घर से बेदखल करने की याचिका दायर की. कमिश्नर कोर्ट ने माता-पिता के पक्ष में ऐतिहासिक आदेश जारी किया….और पढ़ें

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बुजुर्गों

बुजुर्गों की संपत्ति पर अधिकार

हाइलाइट्स

  • बुजुर्ग माता-पिता ने बेटे-बहू को घर से बेदखल करने की याचिका दायर की.
  • कमिश्नर कोर्ट ने माता-पिता के पक्ष में ऐतिहासिक आदेश जारी किया.
  • बेटे-बहू के हंगामे और आगजनी की कोशिशों से परेशान थे माता-पिता.

अनुज गौतम, सागर: सागर जिले के रजाखेड़ी मकरोनिया में रहने वाले 80 वर्षीय रिटायर्ड टीआई हरिहर प्रसाद दुबे और उनकी पत्नी वैजयंती बाई (75) ने अपने ही बेटे-बहू को घर से बेदखल कराने की गुहार लगाई थी.

उनकी याचिका पर अब सागर के कमिश्नर वीरेंद्र सिंह रावत ने ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए कहा है कि संतान को घर में रहने का कोई अधिकार नहीं होता, वह माता-पिता की दया-दृष्टि से मिलता है. अगर वही संतान प्रताड़ना करे, तो बेदखल किया जाना न्यायोचित है.

SDM ने खारिज किया था आवेदन, कमिश्नर ने बदला फैसला
बुजुर्ग दंपती ने पहले सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 की धारा 15 के तहत एसडीएम अदिति यादव की कोर्ट में आवेदन दिया था, लेकिन कोर्ट ने इसे क्षेत्राधिकार से बाहर बताकर खारिज कर दिया था.

इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नन्होरिया की मदद से कमिश्नर कोर्ट में अपील की गई, जहां से 15 दिन के भीतर कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं.

बेटा-बहू करते थे हंगामा, आगजनी की कोशिश भी
एडवोकेट पवन नन्होरिया ने बताया कि बेटा अरुण दुबे और बहू ज्ञानेश्वरी दुबे तीसरी मंजिल पर रहते हैं. रोज कोई न कोई नया झगड़ा, कभी सामान फेंक देते, तो कभी घर में आगजनी की कोशिश करते.”

बुजुर्ग दंपती ने बताया कि अब हम अपने ही घर में डर के साए में जी रहे हैं. शांति नाम की कोई चीज़ नहीं बची.

कानूनी नजरिए से बड़ा फैसला: बच्चों को निकाल सकते हैं माता-पिता
कमिश्नर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि माता-पिता की संपत्ति पर संतान का अधिकार तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक वे उन्हें खुद न रहने दें. अगर माता-पिता असहज या असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो उन्हें कानूनी रूप से बेदखल करने का अधिकार है.

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