February 21, 2026
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अगर बच्चा घबराए तो पैरेंट्स संभल जाएं, वह हो सकता है किसी डर का शिकार

  • May 4, 2025
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Last Updated:May 04, 2025, 18:01 IST कहा जाता है कि बच्चे की परवरिश जैसी होती है, वह वैसा ही बनता है. बच्चे मासूम होते हैं और कच्ची मिट्टी

अगर बच्चा घबराए तो पैरेंट्स संभल जाएं, वह हो सकता है किसी डर का शिकार

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कहा जाता है कि बच्चे की परवरिश जैसी होती है, वह वैसा ही बनता है. बच्चे मासूम होते हैं और कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं जिसे किसी भी सांचे में ढाला जा सकता है. अगर बच्चे के मन में किसी चीज का डर बैठ जाए तो जिंदगी…और पढ़ें

अगर बच्चा घबराए तो पैरेंट्स संभल जाएं, वह हो सकता है किसी डर का शिकार

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बच्चा अगर डरे तो पैरेंट्स को उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए (Image-Canva)

Help a child overcome fears: छोटे बच्चे बहुत मासूम होते हैं. अगर कोई व्यक्ति उन पर चिल्लाता है तो वह तुरंत डरकर रोने लगते हैं. लेकिन कई बार किसी बात का डर उनके मन में इस कदर बैठ जाता है कि अगर उसे समय पर दूर ना किया जाए तो उसका असर उनकी पर्सनैलिटी पर पड़ सकता है. डरने वाले बच्चे का कॉन्फिडेंस हमेशा कम होता है. वह लोगों से भी दूर रहने लगता है. ऐसे में पैरेंट्स की जिम्मेदारी है कि उनके मन से हर तरह के डर को दूर भगाएं. 

पैरेंट्स ना करें ऐसी बातें
पैरेंटिंग एक्सपर्ट आशिता भारद्वाज कहती हैं कि हमारे आसपास ऐसे कई पैरेंट्स हैं जो बच्चों को शरारत करने पर डराना शुरू कर देते हैं. भूत आ जाएगा, पुलिस पकड़कर ले जाएगी, पापा मारेंगे…इस तरह की बातें उनके मन में डर पैदा कर सकती हैं. दरअसल उन्हें जो पैरेंट्स कहते हैं, वह उसे सच मानने लगते हैं. यह पैरेंट्स की सबसे बड़ी भूल होती है. अगर बच्चा शरारत करे तो उसे प्यार से समझाएं.  

डरने की वजह जानें
अगर बच्चा किसी इंसान से डरता हो या किसी चीज से तो बच्चे से बात करें. यह जानने की कोशिश करें कि बच्चे के मन में यह डर कैसे बैठा. दरअसल डर किसी भी तरह का हो, वह बच्चे की जिंदगी पर बुरा असर ही डालता है. बच्चे के साथ अपने कम्युनिकेशन को बढाएं. उनके साथ वक्त बिताएं और बातों-बातों में इसका कारण जानने की कोशिश करें. हो सकता है कि बच्चे के दिमाग में कोई चाइल्डहुड ट्रॉमा हो या किसी ने उसके साथ गलत हरकत की हो. इसलिए जब बच्चा डरे तो पैरेंट्स को अलर्ट हो जाना चाहिए.

बच्चे को सुरक्षा का एहसास कराएं
बच्चे के लिए उसके पैरेंट्स उसका सुरक्षा कवच होते हैं इसलिए उन्हें हमेशा सुरक्षित महसूस कराएं. उन्हें गले लगाएं, प्यार से बात करें, जब बच्चे को आपकी जरूरत हो, उसके साथ मौजूद रहें. इससे बच्चा अकेला महसूस नहीं करेगा. अगर उसके कम नंबर आएं तो डांटे नहीं बल्कि उसे बेहतर करने के लिए मोटिवेट करें, छोटी-छोटी खुशियों को उसके साथ सेलिब्रेट करें, उसके साथ गेम्स खेलें. इससे बच्चा डर के बारे में नहीं सोचेगा.

डर का सामना करना सिखाएं
बच्चे को स्ट्रॉन्ग बनाना है और उसका डर दूर करना है तो उसका डर से सामना कराएं. जैसे अगर बच्चा बिजली से डरता है तो उससे स्विच ऑन-ऑफ कराएं, उसे पानी से डर लगता है तो स्विमिंग करना सिखाएं. इससे बच्चे का डर खुलेगा और वह चीज उसके लिए सामान्य हो जाएगी. इस तरह उसकी मेंटल हेल्थ पर भी असर नहीं पड़ेगा.

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